मनोज परमार की अपील पर मानवता जीती, भिक्षुकों ने भी खोला दिल

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SMA पीड़ित 3 वर्षीय अनिका के इलाज के लिए समाज ने पेश की एकजुटता की मिसाल
आदित्य शर्मा
इंदौर। स्पाइनल मस्कुलर एट्रॉफी (SMA) टाइप–2 जैसी अत्यंत गंभीर और दुर्लभ बीमारी से जूझ रही 3 वर्षीय मासूम अनिका शर्मा के इलाज के लिए समाज के हर वर्ग ने आगे आकर मानवता की मिसाल पेश की है। अखिल भारतीय श्री बलाई महासंघ द्वारा अनिका के उपचार हेतु 2 लाख 51 हजार रुपये की सहयोग राशि एकत्र कर परिवार को सौंपी गई, जो सामाजिक संवेदनशीलता और सेवा भाव का सशक्त उदाहरण है।
जानकारी के अनुसार, अनिका शर्मा जन्म से ही SMA टाइप–2 बीमारी से पीड़ित है। यह बीमारी शरीर की मांसपेशियों को धीरे-धीरे कमजोर कर देती है और इसके इलाज में करोड़ों रुपये तक का खर्च आता है। अनिका का परिवार आर्थिक रूप से अत्यंत कमजोर है, ऐसे में इतने महंगे इलाज की व्यवस्था करना उनके लिए लगभग असंभव हो गया था।
परिवार की इस पीड़ा को देखते हुए अखिल भारतीय श्री बलाई महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं दलित समाज के प्रखर नेता मनोज परमार ने 14 जनवरी, मकर संक्रांति के पावन अवसर पर इंदौर में आयोजित एक सामाजिक कार्यक्रम के मंच से समाज से भावुक अपील की। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते अनिका को इलाज नहीं मिला तो उसका जीवन खतरे में पड़ सकता है।
मनोज परमार की यह अपील समाज के दिलों तक तुरंत पहुंची। अन्नपूर्णा मंदिर क्षेत्र स्थित प्रसिद्ध रणजीत हनुमान मंदिर एवं साईं बाबा मंदिर परिसर में बैठने वाले भिक्षुकों, दैनिक श्रमिकों, मध्यमवर्गीय परिवारों और आर्थिक रूप से कमजोर लोगों ने भी बढ़-चढ़कर दान दिया। कई भिक्षुकों ने अपनी रोज़ की कमाई से मदद करते हुए भावुक शब्दों में कहा,
“जब हम जैसे गरीब लोग अपनी रोज़ी-रोटी में से हिस्सा निकाल सकते हैं, तो संपन्न वर्ग को भी आगे आकर ऐसे मासूम की जान बचानी चाहिए।”
इसी सामाजिक चेतना, करुणा और सेवा भाव के चलते 2.51 लाख रुपये की राशि एकत्र कर अनिका के इलाज के लिए सौंप दी गई। इस अवसर पर मनोज परमार ने कहा,
“समाज तभी सशक्त बनता है जब वह अपने सबसे कमजोर सदस्य का हाथ थामता है। अनिका सिर्फ एक परिवार की बेटी नहीं, बल्कि पूरे समाज की बेटी है।”
उन्होंने समाज के सक्षम और संपन्न लोगों से आगे आने की अपील करते हुए कहा कि अनिका के इलाज में हर दिन कीमती है और समय पर सहयोग ही उसकी जिंदगी को सुरक्षित कर सकता है।
यह पूरा घटनाक्रम समाज में मानवता, संवेदनशीलता, करुणा और सामूहिक जिम्मेदारी का जीवंत उदाहरण बनकर सामने आया है, जिसने यह साबित कर दिया कि जब समाज एकजुट होता है, तो असंभव को भी संभव बनाया जा सकता है।

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