'एक पेड़ माँ के नाम' अभियान के तहत कृषि महाविद्यालय में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने किया 15 हजार पौधारोपण का शुभारंभ
हमारा देश दुनिया का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश है इसलिए हमारे बोलने के अधिकार को कोई छीन नहीं सकता है - मंत्री कैलाश विजयवर्गीय
आंदोलन प्रजातंत्र में जरूरी है, लेकिन इसका स्वरूप मर्यादित होना चाहिए - मंत्री कैलाश विजयवर्गीय
सीजेपी के आंदोलन में कुछ 4-5 सौ लोगों ने दुनिया भर में भारत की छवि खराब की है - मंत्री कैलाश विजयवर्गीय
सह संपादक अनिल चौधरी
इंदौर - 'एक पेड़ माँ के नाम'अभियान के तहत 2 अगस्त रविवार को नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की उपस्थिति में कृषि महाविद्यालय परिसर में 15 हजार पौधारोपण का शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर बोलते हुए मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि सीजेपी के आंदोलन में कुछ 4-5 सौ लोगों ने दुनिया भर में भारत की साख खराब की है। देश के प्रधानमंत्री जी का दिल भी देखिए आप... उन्होंने इनको माफ कर दिया। उसके बाद अभद्र भाषा बोलेने वाले रो-रोकर माफी मांगने का विडिया वायरल कर रहे हैं।
प्राकृतिक खेती से मेडिकल का खर्चा होगा कम
इस अवसर पर उपस्थित जनसमुदाय को संबोधित करते हुए मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि कृषि कॉलेज से मेरा पुराना आत्मीय संबंध रहा है। मैं जब कॉलेज के डीन श्राफ सर से चर्चा करने के लिए आता था। उस समय भी पहला चैलेंज यह था कि जनसंख्या बढ़ रही है और खेती की जमीन कम हो रही है इसलिए हमें कम जमीन में ज्यादा उत्पाद करना चाहिये। दूसरा चैलेंज यह कि रसायनों से खेती हो रही है, जो हमारे स्वास्थ के लिए हानिकारक है। मैं ऑस्ट्रेलिया गया था। वहां एक युवा किसान के पास डेढ़ हजार एकड़ जमीन थी। उसकी पत्नी और माँ दोनों की मौत कैंसर से हुई थी। डॉक्टर ने उसको बताया की दोनों की मौत की वजह यह रासायनिक खेती है। उस युवा ने इससे सबक सीखते हुए एक आंदोलन चलाया और सहकारिता के माध्यम से एक लाख एकड़ जमीन पर आर्गेनिक खेती का ऑस्ट्रेलिया में आगाज किया। उसने एक मॉल बनाया जहां सिर्फ आर्गेनिक प्रोडक्ट बिकते हैं। यह बात सही है आर्गेनिक खेती का उत्पादन कम होता है, लेकिन उसके प्रोडक्ट के दाम भी ज्यादा मिलते हैं। हमें भारत की परंपराओं से सीखते हुए कृषि करना चाहिये। पहले हर किसान के पास गाय होती थी। वह दूध नहीं देती थी तब भी किसान उसका पालन-पोषण करते थे। उसके मूत्र और गोबर का उपयोग खेतों में करते थे। पहले आदिवासी इलाकों में आदिवासी लोग बीमार नहीं होते थे। वहां हॉस्पीटल भी नहीं थे। आर्गेनिक खेती से वे लोग निरोगी रहते थे। सरकार ने जब अस्पताल बनाए तब भी वह उस अस्पताल से दूर रहते थे, लेकिन अब रासायनिक खेती से उनको सभी बीमारी होने लगी जो आम शहरी लोगों को हो रही है। हमें आर्गेनिक खेती को बढ़ावा देने के लिए रिसर्च करना चाहिये। यदि हम प्राकृतिक खेती करेंगे तो हमारा मेडिकल का खर्चा काफी कम हो जाएगा। उन्होंने युवाओं से कहा कि देश को जितनी इंजीनियर और डॉक्टर की जरूरत है उतनी ही कृषि वैज्ञानिकों की भी जरूरत है।
हमने भी आदोलन में पुलिस के काफी लट्ठ खाए हैं
सीजेपी के आंदोलन पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि आंदोलन प्रजातंत्र में जरूरी है, लेकिन इसका स्वरूप मर्यादित होना चाहिए। हमारे यहां बेटियों को सीता, गीता, सावित्री माना गया है। पैर पूजे जाते हैं, लेकिन यदि कोई बेटी जेन जी के मंच से पीएम मोदी जी के खिलाफ अमर्यादित टिप्पणी करे तो किसको अच्छा लगेगा? आंदोलन करने का अधिकार सभी को है। मैने अपनी जिंदगी में कई आंदोलन किए और पुलिस के काफी लट्ठ खाए। जब हम दीपक और हलधर किसान का चुनाव चिंन्ह लेकर निकलते थे तब कभी यह नहीं सोचा था कि हमारी सरकार बनेगी। यह तो ईश्वर की कृपा और जनता का आशीर्वाद है कि जो पुलिस हमारे पीछे डंडा लेकर दौड़ती थी वह पुलिस आज हमारा दरवाजा भी खोलती है। हमारा देश दुनिया का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश है इसलिए हमारे बोलने के अधिकार को कोई छीन नहीं सकता है। एक बार एक नेता ने आपातकाल लगाकर हमारे बोलने के अधिकार को छीना था जनता ने उनको सबक सीखा दिया। सरकार को आप वोट देकर चुनते हैं और यदि सरकार गलत करती है तो आपको सरकार के खिलाफ खड़े होने का अधिकार है। हम अपने माता-पिता से भी नाराज हो जाते हैं, लेकिन हम मर्यादा नहीं छोड़ते हैं।
गौरतलब है शहर में हरीत क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए जलवायु अनुकुल करीब 5 से लेकर 10 फीट तक के पौधों का रोपण शहर के विभिन्न हिस्सों में किया जा रहा है। वृक्षारोपण अभियान के तहत कृषि महाविद्यालय में 2 हजार फलदार पौधों का और शेष मालवा की मिट्टी के अनुकूल पौधों का रोपण किया गया। वृक्षारोपण के इस कार्यक्रम में भाजपा नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा, जनकार्य समिति अध्यक्ष राजेंद्र राठौड़, कॉलेज के डीन डॉ. भारत सिंह, स्थानीय पार्षद लक्ष्मी अनिल गौहर, पार्षद राजीव जैन भाजपा के पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं के अलावा बड़ी संख्या में आम लोगों ने हिस्सा लेकर पौधारोपण किया।

