पिता के पसीने से लिखी गई कामयाबी की इबारत, मुस्कान शेख अब 'बैटलग्राउंड' में दिखा रही हैं दम
शिवपुरी से ऋषि गोस्वामी की रिपोर्ट
शिवपुरी ब्यूरो। मध्य प्रदेश के शिवपुरी की गलियों से निकलकर सात समंदर पार देश का तिरंगा लहराने वाली मुस्कान शेख की कहानी हर उस व्यक्ति के लिए प्रेरणा है जो संसाधनों की कमी का रोना रोते हैं। मुस्कान की इस सफलता के पीछे उनके पिता दारा मोहम्मद खान की वर्षों की कड़ी मेहनत और त्याग छुपा है।
मजदूरी से गोल्ड मेडल तक का सफर
दारा मोहम्मद खान ने सालों तक दूसरों के यहाँ गन्ने की मशीन पर काम कर अपने परिवार को संभाला। तंगहाली के बावजूद उन्होंने मुस्कान के सपनों से समझौता नहीं किया। खुद कोच बनकर बेटी को तराशा और नतीजा सबके सामने है—ऑस्ट्रेलिया में पावर लिफ्टिंग में 4 स्वर्ण पदक।
अब 'बैटलग्राउंड' में चुनौती
पावर लिफ्टिंग की दुनिया में लोहा मनवाने के बाद मुस्कान अब एक नए मंच पर सक्रिय हैं। 'बैटलग्राउंड सीजन 2' में शिवपुरी की यह जांबाज खिलाड़ी अपनी ताकत और तकनीक का प्रदर्शन कर रही है। उनके पिता आज भी उनके सबसे बड़े संबल बने हुए हैं। स्थानीय प्रशासन और खेल संघों ने मुस्कान की इस निरंतर सफलता की सराहना की है।

