कटनी नगर निगम में जल्द शुरू होगी ऑनलाइन नामांतरण व्यवस्था: निगमायुक्त सुश्री तपस्या परिहार की पहल

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​राजस्व अमले को दिया गया व्यावहारिक प्रशिक्षण; अब घर बैठे मिलेगी हर आवेदन की स्थिति, तय समय-सीमा में निराकरण न होने पर सिस्टम खुद जारी करेगा 'रेड फ्लैग'
कटनी से जिला ब्यूरो नवल किशोर 
​कटनी। नगर पालिक निगम कटनी नागरिक सेवाओं को अधिक सुगम, पारदर्शी और जवाबदेह बनाने की दिशा में एक बड़ा डिजिटल कदम उठाने जा रहा है। निगमायुक्त सुश्री तपस्या परिहार की पहल पर अब नागरिकों के भवनों एवं निगम स्वामित्व की दुकानों के नामांतरण (म्यूटेशन) की पूरी प्रक्रिया को पूरी तरह ऑनलाइन किया जा रहा है। इस संबंध में निगमायुक्त द्वारा समय-सीमा की बैठक में दिए गए निर्देशों के बाद शुक्रवार को एम.आई.सी. कक्ष में राजस्व शाखा के अधिकारियों एवं कर्मचारियों को ऑनलाइन व्यवस्था का विशेष प्रशिक्षण प्रदान किया गया।
​बार-बार नहीं काटने पड़ेंगे निगम के चक्कर
​इस नई व्यवस्था के लागू होने के बाद नागरिकों को नामांतरण के लिए नगर निगम कार्यालय के चक्कर लगाने से मुक्ति मिलेगी। आवेदन करने से लेकर दस्तावेज अपलोड, एनओसी (अनापत्ति प्रमाण-पत्र), सार्वजनिक सूचना का प्रकाशन, मौका निरीक्षण, अनुमोदन और अंतिम आदेश जारी होने तक की संपूर्ण प्रक्रिया ऑनलाइन संपन्न होगी। इससे समय की बचत होगी और पूरी कार्यप्रणाली में पारदर्शिता आएगी।
​घर बैठे ट्रैक होगा आवेदन का 'स्टेटस'
​डिजिटल व्यवस्था के तहत आवेदक अपने नामांतरण आवेदन की वर्तमान स्थिति घर बैठे ऑनलाइन देख सकेंगे। उन्हें यह भी पता रहेगा कि उनका प्रकरण किस अधिकारी के पास लंबित है और कार्रवाई किस चरण में है। दस्तावेजों में किसी भी प्रकार की कमी होने पर आवेदक को तत्काल एसएमएस (SMS) और पोर्टल के माध्यम से सूचित किया जाएगा, जिससे फाइल गुम होने या बेवजह की आपत्तियों जैसी गड़बड़ियों पर प्रभावी रोक लगेगी।
​रेड फ्लैग' से तय होगी अधिकारियों की जवाबदेही
​इस ऑनलाइन पोर्टल की सबसे बड़ी विशेषता इसकी चरणबद्ध मॉनिटरिंग प्रणाली है। यदि कोई नामांतरण प्रकरण शासन द्वारा निर्धारित समय-सीमा से अधिक समय तक लंबित रहता है, तो सिस्टम स्वतः ही संबंधित अधिकारी के लॉगिन पर 'रेड फ्लैग' (Red Flag) जारी कर देगा। ऐसी स्थिति में अधिकारी को विलंब का उचित कारण दर्ज करना अनिवार्य होगा। बिना किसी ठोस कारण के देरी पाए जाने पर संबंधितों की जवाबदेही तय की जाएगी।
​सुशासन और राजस्व वृद्धि में मददगार
​मामले में निगमायुक्त सुश्री तपस्या परिहार का कहना है कि तकनीक आधारित पारदर्शी व्यवस्था ही सुशासन की असली पहचान है। ऑनलाइन व्यवस्था से जहां एक ओर मानवीय हस्तक्षेप कम होगा और जनता का प्रशासन पर विश्वास मजबूत होगा, वहीं दूसरी ओर समय पर नामांतरण शुल्क प्राप्त होने से नगर निगम के राजस्व में भी वृद्धि होगी। इस राजस्व का उपयोग शहर के विकास कार्यों में किया जाएगा। कर्मचारियों की कार्य सुविधा के लिए जल्द ही दूसरे चरण का व्यावहारिक प्रशिक्षण भी आयोजित किया जाएगा।

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