नेपानगर क्षेत्र में पोला की धूम: किसान मोर्चा जिलाध्यक्ष राहुल जाधव ने मनाया पारंपरिक पर्व, बोले- 'पशुधन ही ग्रामीण अर्थव्यवस्था का आधार'

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महेन्द्र मालवीय रणजीत टाईम्स
बुरहानपुर जिले सहित  सम्पूर्ण नेपानगर में गुरुवार को किसानों का पारंपरिक और आस्था से जुड़ा पोला पर्व बेहद उत्साह, उमंग और श्रद्धा भाव के साथ मनाया गया। खेती-किसानी के मुख्य आधार और कृषि कार्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले बैलों के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने के लिए किसानों ने सुबह से ही विशेष तैयारियां कीं।

रंग-बिरंगी सजावटी सामग्री से हुआ बैलों का श्रृंगार

पोला पर्व को लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में सुबह से ही खासा उत्साह देखने को मिला। किसानों ने सबसे पहले अपने बैलों को नहला-धुलाकर साफ-सुथरा किया। इसके बाद रंग-बिरंगी सजावटी सामग्री से बैलों का आकर्षक श्रृंगार किया गया, सींगों को रंगा गया तथा गले में घुंघरू व घंटियां पहनाई गईं। जब सजे-धजे बैल घरों से बाहर निकले तो पूरा क्षेत्र पर्व के उल्लास में डूब गया।


भाजपा किसान मोर्चा जिलाध्यक्ष ने भी सादगी व उत्साह से मनाया पर्व
पोला पर्व के इस पावन अवसर पर भारतीय जनता पार्टी किसान मोर्चा के जिलाध्यक्ष राहुल जाधव ने भी ग्रामीण परंपराओं के अनुसार अत्यंत धूमधाम और उत्साह के साथ पोला पर्व मनाया। उन्होंने विधि-विधान से बैलों की पूजा-अर्चना कर उन्हें मिष्ठान खिलाया। इस दौरान राहुल जाधव ने क्षेत्रवासियों को पर्व की शुभकामनाएं देते हुए संदेश दिया कि पोला पर्व हमारी सनातन संस्कृति, कृषि परंपरा और पशुधन के प्रति सम्मान व्यक्त करने का एक अनूठा प्रतीक है। उन्होंने कहा कि आधुनिकता के इस दौर में भी बैलों और कृषि संसाधनों के प्रति कृतज्ञता की यह परंपरा हमारी ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूती और प्रकृति से जुड़ाव को दर्शाती है।

खानमन्नी की परंपरा के बाद हुई पूजा-अर्चना

ग्रामीण परंपरा के अनुसार पोला पर्व से पूर्व 'खानमन्नी' की रस्म निभाई जाती है, जिसमें बैलों को भोजन का निमंत्रण देने की मान्यता है। पोला के दिन किसानों ने अपने-अपने घरों में पूरनपोली व विभिन्न प्रकार के स्वादिष्ट व्यंजन एवं मिष्ठान बनाकर बैलों को प्रेमपूर्वक भोजन कराया।

मंदिरों में मत्था टेक मांगी सुख-समृद्धि की कामना

भाजपा किसान मोर्चा के जिलाध्यक्ष राहुल जाधव सहित अन्य ग्रामों के  किसान रतनसिंह राठौड़, सुभाष चौहान, कन्हैया चौहान और नवल राठौड़ ने बताया कि पोला पर्व किसानों के लिए बेहद पवित्र दिन है। इस दिन बैलों को विश्राम देकर परिवार के सदस्य की तरह पूजा जाता है। किसानों ने अपने बैलों को पास स्थित देवी-देवताओं के मंदिरों में ले जाकर विधि-विधान से पूजा की और श्रीफल (नारियल) चढ़ाकर क्षेत्र में अच्छी फसल, खुशहाली और सुख-समृद्धि की प्रार्थना की।
पोला पर्व के इस आयोजन ने एक बार फिर जिले में ग्रामीण संस्कृति, समृद्ध कृषि परंपरा और किसान-बैल के अटूट आत्मीय संबंध की सुंदर झलक पेश की।

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