चित्त की निर्मलता ही आध्यात्मिक उन्नति का आधार

  • Share on :

आज का युग अभूतपूर्व सुविधाओं का है, फिर भी मनुष्य का मन पहले से अधिक अशांत, तनावग्रस्त और असंतुष्ट दिखाई देता है। प्रतिस्पर्धा, भागदौड़ और नकारात्मक वातावरण के कारण मन में क्रोध, भय, चिंता और अस्थिरता बढ़ती जा रही है। यही अशांत मन धीरे-धीरे व्यक्ति की मानसिक और शारीरिक सेहत को प्रभावित करता है तथा जीवन से सुख और संतुलन छीन लेता है। ऐसे समय में सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि मन और चित्त को निर्मल तथा स्थिर कैसे बनाया जाए?
सहजयोग के अनुसार, जब तक चित्त शुद्ध नहीं होता, तब तक सच्ची शांति, आत्मसंतोष और आध्यात्मिक उन्नति का अनुभव संभव नहीं है। चित्त की निर्मलता साधक की साधना को शक्ति प्रदान करती है और उसे निर्विचार चेतना की उस अवस्था तक ले जाती है, जहाँ मन स्वतः शांत, संतुलित और आनंदमय हो जाता है।
सहजयोग की संस्थापिका परम पूज्य श्री माताजी निर्मला देवी ने अपने प्रवचनों में बताया है कि मानव शरीर के सूक्ष्म तंत्र में स्थित मूलाधार चक्र पर श्री गणेश जी की दिव्य शक्ति कार्य करती है। श्री गणेश पवित्रता, मासूमियत और विवेक के प्रतीक हैं। उनकी शक्ति हमारे विचारों, चित्त, हृदय तथा सूक्ष्म चक्रों को निर्मल बनाकर क्रोध, असुरक्षा और नकारात्मक प्रवृत्तियों को शांत करती है। जब मूलाधार चक्र संतुलित होता है, तब व्यक्ति के भीतर सहज रूप से शुद्धता और आत्मविश्वास का विकास होने लगता है।
इसी प्रकार स्वाधिष्ठान चक्र, जिस पर श्री ब्रह्मदेव एवं श्री सरस्वती की शक्तियाँ कार्य करती हैं, हमारी सृजनात्मक क्षमता, शुद्ध ज्ञान और विचारों के संतुलन का केंद्र है। इस चक्र के शुद्ध होने पर अनावश्यक विचारों की गति कम होने लगती है और साधक निर्विचार चेतना का अनुभव करता है। यही अवस्था आत्मसाक्षात्कार तथा आध्यात्मिक जागृति की दिशा में महत्वपूर्ण आधार बनती है।
सहजयोग ध्यान की विशेषता यह है कि इसमें सूक्ष्म चक्रों का जागरण और संतुलन सहज एवं स्वाभाविक रूप से होता है। नियमित ध्यान के माध्यम से व्यक्ति अपने भीतर स्थित दिव्य शक्तियों का अनुभव कर सकता है, मानसिक तनाव से मुक्ति पा सकता है तथा जीवन में शांति, संतुलन और आनंद का अनुभव कर सकता है। यही निर्मल चित्त व्यक्ति को स्वयं के साथ-साथ परिवार और समाज में भी सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए प्रेरित करता है।
यदि आप भी मन की वास्तविक शांति, विचारों की स्थिरता और आत्मिक आनंद का अनुभव करना चाहते हैं, तो अपने निकटतम सहजयोग ध्यान केंद्र पर आयोजित निःशुल्क ध्यान सत्र में सम्मिलित होकर इस दिव्य अनुभूति का लाभ उठाएँ।
निकटतम सहजयोग ध्यान केंद्र की जानकारी टोल-फ्री नंबर 1800-270-0800 अथवा www.sahajayoga.org.in से प्राप्त कर सकते हैं।

Latest News

Everyday news at your fingertips Try Ranjeet Times E-Paper