शास्त्रीय संगीत पर आधारित राग व वाद्ययंत्र हमारे सूक्ष्म चक्रों को सशक्त बनाते हैं

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 संगीत केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि मन और शरीर को शांति एवं सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करने वाला एक प्रभावशाली साधन भी है। सहजयोग में ध्यान और संगीत का विशेष महत्व माना गया है। हम सभी ने अनुभव किया होगा कि किसी कार्य को करते समय धीमी आवाज में मधुर संगीत सुनने से मन प्रसन्न रहता है और थकान का अनुभव भी कम होता है। यही कारण है कि आज संगीत को कृषि एवं पशुपालन जैसे क्षेत्रों में भी प्रयोग किया जा रहा है।
सहजयोग के अनुसार हमारे शरीर में स्थित सूक्ष्म शक्ति केंद्र अर्थात चक्र, ईश्वर से जुड़े हुए हैं। शास्त्रीय संगीत और विभिन्न वाद्ययंत्र भी ईश्वरीय उपासना के महत्वपूर्ण माध्यम माने जाते हैं। एकाग्रता, सुर और लय के साथ गाया गया संगीत मन को भीतर की ओर ले जाने में सहायक होता है। भजन और आरती भी इसी भाव से गाए जाते हैं। सहजयोग की साधना में यह अनुभव किया जाता है कि ईश्वर हमारे भीतर ही विद्यमान हैं और संगीत के माध्यम से हम अपने भीतर स्थित दिव्य चेतना से जुड़ सकते हैं।
परम पूज्य श्री माताजी निर्मला देवी ने विभिन्न चक्रों के लिए विशिष्ट रागों और वाद्ययंत्रों का उल्लेख किया है। ध्यान की अवस्था में संबंधित चक्र पर ध्यान केंद्रित करते हुए उस चक्र से संबंधित राग अथवा वाद्ययंत्र का श्रवण करने से साधक को ध्यान में गहराई प्राप्त करने और सूक्ष्म तंत्र को संतुलित करने में सहायता मिल सकती है।
राग और वाद्य यंत्र जो हर चक्र पर प्रभावी होते हैं उनका विवरण इस प्रकार है:- 
1 मूलाधार चक्र :    राग - श्याम कल्याण/ बिलावल, वाद्य यंत्र- शहनाई 
2 स्वाधिष्ठान चक्र :  राग : तोड़ी / यमन  ,      वाद्य यंत्र - वीणा 
3 नाभि चक्र : राग -  ललित / गुनकली,   
    वाद्य यंत्र - संतूर
4 भवसागर : राग - मालकौंस 
5 हृदय चक्र : राग - भैरवी/दुर्गा/भैरव 
    तबला-मृदंग
6 विशुद्धि चक्र : राग -  जय-जयवंती, 
    वाद्य यंत्र -  बॉंसुरी
7 आज्ञा चक्र : राग - भूप /बागेसरी, 
     वाद्य यंत्र - सरोद
8 सहस्त्रार  चक्र -  राग -  दरबारी / भैरवी , 
     वाद्य यंत्र  -  सितार
ध्यान के समय सुनियोजित तरीके से श्री माताजी के प्रवचन के साथ साथ राग या वाद्य यंत्र को सुनकर ध्यान करना, ध्यान को पूर्णता  प्रदान करता है।  इससे हमारे चक्र तो शक्तिशाली होते ही हैं, हमारा चेहरा भी तेजोमय हो जाता है। यदि किसी चक्र पर समस्या है तो उस चक्र का राग या वाद्य यंत्र दो तीन दिन लगातार सुनकर उस चक्र को संतुलित किया जा सकता है।
इस अनूठी ध्यान पद्धति से जुड़ने हेतु व आत्मसाक्षात्कार  को प्राप्त करने हेतु अपने नज़दीकी सहजयोग ध्यान केंद्र की जानकारी टोल फ्री नंबर 1800 2700 800 अथवा   वेबसाइट sahajayoga.org.in  से प्राप्त कर सकते हैं।  सहज योग पूर्णतया निशुल्क है।

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