गरबा पांडालों में प्रवेश और व्यवसाय को लेकर राष्ट्रीय सनातन सेना भारत ने उठाई आवाज
विशाल मंडलोई बोले—मां की आराधना में शामिल होने वालों को धार्मिक परंपराओं का पालन होना चाइये
राजेश धाकड़
इंदौर। नवरात्रि पर्व को लेकर शहर में गरबा आयोजनों की तैयारियां शुरू हो गई हैं। इसी बीच गरबा पांडालों में प्रवेश व्यवस्था, धार्मिक परंपराओं के पालन और गरबा की आड़ में व्यवसायिक गतिविधियों को लेकर राष्ट्रीय सनातन सेना भारत ने अपनी बात सामने रखी है। संगठन के जिला उपाध्यक्ष इंदौर विशाल मंडलोई ने मीडिया से चर्चा करते हुए कहा कि गरबा पांडाल केवल मनोरंजन का स्थल नहीं, बल्कि मां भगवती की आराधना और धार्मिक आस्था से जुड़ा आयोजन है। ऐसे में आयोजन की धार्मिक मर्यादा और परंपराओं का पालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
विशाल मंडलोई ने कहा कि नवरात्रि के दौरान गरबा पांडालों में बड़ी संख्या में श्रद्धालु मां की आराधना और धार्मिक उत्सव में शामिल होते हैं। इसलिए आयोजकों द्वारा पांडाल में प्रवेश के लिए स्पष्ट नियम और जो लोग मां की आराधना में शामिल होना चाहते हैं, उन्हें आयोजन की धार्मिक परंपराओं और आयोजकों द्वारा निर्धारित नियमों का सम्मान करना चाहिए।
तिलक और धार्मिक परंपरा का पालन करने की बात
विशाल मंडलोई ने कहा कि संगठन की ओर से यह मांग रखी जा रही है कि गरबा पांडालों में प्रवेश करने वाले लोगों के लिए धार्मिक परंपराओं के अनुरूप व्यवस्था हो। उन्होंने तिलक लगाने और धार्मिक परंपरा के अनुरूप गरबा आयोजन में शामिल होने की बात कही। उनका कहना है कि इससे आयोजन की धार्मिक पहचान और गरिमा बनी रहेगी।
उन्होंने कहा कि नवरात्रि में आयोजित गरबा को केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं किया जाना चाहिए। यह पर्व मां शक्ति की आराधना, श्रद्धा और भारतीय धार्मिक परंपराओं से जुड़ा हुआ है। इसलिए आयोजकों को आयोजन की धार्मिक भावना और श्रद्धालुओं की आस्था का विशेष ध्यान रखना चाहिए।
गरबा की आड़ में व्यवसायिक गतिविधियों पर आपत्ति
राष्ट्रीय सनातन सेना भारत की ओर से गरबा आयोजनों में धार्मिक आयोजन की आड़ में किसी भी प्रकार की व्यवसायिक गतिविधि किए जाने पर भी आपत्ति जताई गई। विशाल मंडलोई ने कहा कि गरबा आयोजन का मूल उद्देश्य धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़ा होना चाहिए। उन्होंने आयोजकों से अपील की कि आयोजन के दौरान ऐसी गतिविधियों पर निगरानी रखी जाए, जिनसे धार्मिक आयोजन का स्वरूप प्रभावित हो।
उन्होंने कहा कि यदि किसी आयोजन में व्यावसायिक गतिविधियों की अनुमति दी जाती है तो उसके लिए संबंधित नियमों और प्रशासनिक प्रावधानों का पालन किया जाना चाहिए। संगठन की ओर से इस संबंध में आयोजकों और प्रशासन के समक्ष अपनी बात रखी जाएगी।
आयोजकों से स्पष्ट नियम बनाने की अपील
विशाल मंडलोई ने गरबा आयोजकों से अपील की कि पांडाल में प्रवेश को लेकर पहले से स्पष्ट नियम निर्धारित किए जाएं और प्रवेश करने वाले लोगों को आयोजन की आचार-संहिता की जानकारी दी जाए। उन्होंने कहा कि नियम स्पष्ट होने से आयोजकों, श्रद्धालुओं और प्रशासन के बीच किसी प्रकार की असमंजस की स्थिति नहीं बनेगी।
उन्होंने प्रशासन से भी नवरात्रि के दौरान होने वाले गरबा आयोजनों में पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था, कानून-व्यवस्था और भीड़ नियंत्रण के लिए आवश्यक इंतजाम सुनिश्चित करने की मांग की।
धार्मिक आयोजन की गरिमा बनाए रखने पर जोर
राष्ट्रीय सनातन सेना भारत की ओर से कहा गया कि नवरात्रि का पर्व धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़ा हुआ है। इसलिए गरबा आयोजनों में श्रद्धालुओं की भावनाओं और धार्मिक आयोजन की गरिमा का सम्मान किया जाना चाहिए। संगठन ने आयोजकों से प्रशासन द्वारा निर्धारित नियमों का पालन करते हुए शांतिपूर्ण और व्यवस्थित आयोजन करने की अपील की है।

