सहजयोग आज का महायोग : हृदय चक्र की जागृति से प्राप्त होती है निडरता, आत्मविश्वास एवं ओजस्विता
भारतीय योग परंपरा में अनहद (हृदय) चक्र को प्रेम, करुणा, सुरक्षा और आत्मबल का केंद्र माना गया है। यह सूक्ष्म शरीर का चौथा चक्र है, जो उरोस्थि (स्टर्नम) के पीछे मेरुरज्जु में स्थित है तथा इसकी बारह पंखुड़ियाँ हैं। बाल्यावस्था में यह चक्र रोग प्रतिकारक क्षमता के विकास से भी जुड़ा माना जाता है।
परम पूज्य श्री माताजी के अनुसार हृदय चक्र के तीन प्रमुख आयाम हैं। दाहिने भाग पर श्रीराम का स्थान है, जो मर्यादा, उत्तरदायित्व और पितृ संरक्षण के प्रतीक हैं। बाएँ भाग का संबंध श्री शिव तथा मातृत्व से है, इसमें आत्मस्वरूप श्री सदाशिव का वास होता है। मध्य भाग देवी जगदम्बा का स्थान है, ये हमें निडरता तथा साहस प्रदान करती हैं। नियमित सहजयोग ध्यान द्वारा जब यह केंद्र संतुलित होता है, तब भय दूर होकर धैर्य, साहस और आत्मविश्वास का विकास होता है।
श्री माताजी ने अपने प्रवचनों में बताया है कि हृदय चक्र की जागृति से मनुष्य के भीतर निस्वार्थ प्रेम, सुरक्षा की भावना, आत्मविश्वास और निर्भयता का संचार होता है। कुण्डलिनी शक्ति जब इस चक्र को प्रकाशित करती है, तब साधक अपने वास्तविक आध्यात्मिक स्वरूप का अनुभव करने लगता है और उसके व्यक्तित्व में ओजस्विता एवं संतुलन का विकास होता है।
हमारे सूक्ष्म शरीर में स्थित कुण्डलिनी शक्ति तथा चक्र आध्यात्मिक विकास की सीढ़ियां हैं। सहजयोग ध्यान द्वारा साधक इन चक्रों के जागरण के माध्यम से अंततः अपने हृदय में स्थित शिव तत्व का अनुभव करता है। आत्मसाक्षात्कार की यह सहज प्रक्रिया प्रत्येक व्यक्ति के लिए उपलब्ध है और जीवन में शांति, संतुलन तथा आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त करती है।
सहजयोग ध्यान निःशुल्क, सरल एवं सभी के लिए उपलब्ध है। आत्मसाक्षात्कार एवं निकटतम सहजयोग ध्यान केंद्र की जानकारी के लिए टोल-फ्री नंबर 1800 2700 800 पर अथवा www.sahajayoga.org.in से प्राप्त कर सकते हैं। सहजयोग पूर्णतया निशुल्क है।

