व्यक्तित्व में त्रिगुणों (सत-रज-तम) को संतुलित करता है सहजयोग

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हमारा सामान्य गृहस्थ जीवन यापन करते समय हम देखते हैं कि सारा संसार त्रिगुणों से आवृत्त है। ये तीन गुण सत्व, रज और तम हैं। पंच महाभूतों से बने हुए हमारे शरीर में ये तीन गुण अपना खेल खेलते रहते हैं। जब हमें प्रसन्नता और आनंद होता है, तब हम सभी के अंदर के अच्छे गुणों की ओर आकृष्ट होते हैं, हमें लगता है कि हम भी जीवन में कुछ अच्छा बनें, हमारे साथ-साथ अपने  माता-पिता और समाज का भी कल्याण करें। हमारे जीवन की जो भी समस्याएं हैं उन सभी समस्याओं से  छुटकारा पाने की पूरी शक्ति हमारे अंदर से आती है। अगर ऐसा व्यक्तित्व आपके अंदर है तो समझ जाइए आप सतोगुण से आवृत्त है। इसके सिवा जो रजोगुणी व्यक्तित्व होते हैं वे अति- महत्वकांक्षी होते हैं, और दूसरों को नीचा दिखाना, किसी से बुरी तरह बात करना, ये सभी रजोगुणी व्यक्तित्व के लक्षण हैं। तमोगुणी व्यक्ति सदैव भूतकाल की पिछली बातों के बारे में सोचता रहता है। कोई भी व्यक्ति जो उदासीन है, उसे तमोगुणी कहा जाएगा।
     प. पू श्री माताजी प्रणित सहजयोग एक ऐसी ध्यान प्रक्रिया है, जिसके माध्यम से आप जान जाते हैं कि आप कौन से गुणों से आवृत्त हैं। सहजयोग में जब साधक को आत्मसाक्षात्कार प्राप्त होता है तो तमो गुणी साधक जो इड़ा-नाड़ी प्रधान है वो अपनी इड़ा नाड़ी को नियमित ध्यान और पंच भौतिक उपचार जैसे की अग्नि तत्व का उपचार कर स्वयं को मध्य में अर्थात सतोगुण की द्योतक सुषुम्ना पर स्थित कर सकता है, वैसे ही रजोगुणी व्यक्ति भी जान जाता है कि सूर्य नाड़ी को जल पैर प्रक्रिया और आईस पैक जैसे नैसर्गिक उपचार कर संतुलित कैसे किया जाय। हम सभी जीवन में अनेक दुःखों का सामना कर रहे हैं, इसका कारण है अज्ञान, हमारे आत्मस्वरूप का अज्ञान।  आत्मसाक्षात्कार हमें आत्मपरीक्षण कर आध्यात्म की राह दिखाता है, इसे वह प्रत्येक व्यक्ति पा सकता है जो सत्य के प्रति जिज्ञासु है। सहजयोग ध्यान में श्री माताजी के समक्ष आप स्वयं आत्मसाक्षात्कार प्राप्त कर संतुलन को तो प्राप्त करते ही हैं साथ ही नियमित अभ्यास  द्वारा अन्य लोगों को आत्मसाक्षात्कार प्रदान करने योग्य भी बन जाते हैं। आत्म परीक्षण द्वारा स्वयं को संतुलित करने का ज्ञान हमें स्वयं का गुरु होने की शक्ति प्रदान करता है। सहजयोग अनुभव द्वारा ज्ञान प्राप्त करने की सनातन ऋषि परंपरा की ध्यान आधारित वैज्ञानिक पद्धति है। ध्यान न तो किसी शारीरिक सक्रियता से संभव है न ही निष्क्रियता से। ध्यान सजग निर्विचार चेतना है जो अत्यंत शक्तिशाली है।
ध्यान की इसी अवस्था को प्राप्त  करने हेतु अपने नज़दीकी सहजयोग ध्यान केंद्र की जानकारी टोल फ्री नंबर 1800 2700 800 से या यूट्यूब चैनल लर्निंग सहजयोगा से प्राप्त कर सकते हैं।

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