'स्क्रीन टाइम डिसऑर्डर' अर्थात् 'मोबाइल एडिक्शन' के उपचार में कारगर है सहजयोग
अत्यधिक मोबाइल का उपयोग आजकल एक गंभीर समस्या बन गया है, जिसे “मोबाइल एडिक्शन” या “स्क्रीन टाइम डिसऑर्डर” कहा जाता है। यह मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है, जैसे कि आंखों की समस्या, सिरदर्द, नींद की कमी, मानसिक थकान तथा एकाग्रता की कमी।
मोबाइल से अत्यधिक लगाव और विचलित मन की समस्या आजकल बहुत आम हो गई है, जो मानसिक तनाव और नींद की कमी का कारण बन सकती है। यह डिजिटल युग में लोगों की मानसिक शांति को प्रभावित कर रहा है, क्योंकि मोबाइल के अत्यधिक उपयोग से लगातार सूक्ष्म रेडिएशन का प्रवाह होता है, जिससे मानसिक संतुलन बिगड़ सकता है और नींद पर भी बुरा असर पड़ता है। बच्चों में यह समस्या और भी गंभीर रूप ले रही है। मोबाइल एडिक्शन उनके संपूर्ण विकास को प्रभावित करता है।
श्री माताजी निर्मला देवी प्रदत्त सहजयोग ध्यान इस स्थिति से बाहर निकालने में बहुत सहायक है। सहजयोग ध्यान के माध्यम से आपको अपने मानसिक विचलन को नियंत्रित करने और गहरी नींद पाने में मदद मिलती है।
चिंता और मानसिक विचलन से मुक्ति
सहजयोग ध्यान का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि हम अपने मन में उठने वाली चिंताओं और विचारों को नियंत्रित करने की कला सीखते हैं। मोबाइल के कारण जो मानसिक विचलन होता है, उसे सहजयोग ध्यान के माध्यम से बड़ी ही सहजता से नियंत्रित किया जा सकता है। सहजयोग में आप ध्यान की अवस्था में वर्तमान में स्थित होते हैं और भूत व भविष्य की चिंताओं से मुक्त हो जाते हैं। आभासी व वास्तविक का भेद स्पष्ट हो जाता है, यह आपके तनाव को कम करता है।
एडिक्शन पर काबू पाना
अगर मोबाइल का अत्यधिक उपयोग मानसिक अस्थिरता का कारण बन रहा है, तो आपको समय-समय पर डिजिटल डिटॉक्स की आवश्यकता हो सकती है। सहजयोग ध्यान इसमें अत्यंत कारगर साबित हो सकता है क्योंकि किसी भी लत से छुटकारा पाने के लिए आवश्यक है कि आपकी इच्छा शक्ति प्रबल हो तथा मन पर आपका पूर्ण नियंत्रण हो। सहजयोग का आधार ही मन की एकाग्रता व निर्विचार स्थिति है। यहां किसी प्रकार की जबरदस्ती की आवश्यकता नहीं होती स्वत: ही जो ग़लत है वो छूट जाता है।
सहजयोग न केवल मानसिक शांति और संतुलन को बढ़ाता है, बल्कि जीवन में अधिक जागरूकता और एकाग्रता को भी बढ़ावा देता है, जिससे जीवन में संतुलन और शांति, उन्नति व आनंद की प्राप्ति होती है। सहजयोग में कलात्मकता का विकास होता है जैसे चित्रकला, नृत्य, संगीत, लेखन आदि में रूचि बढ़ जाती है। व्यक्ति कृत्रिमता से परे प्रकृति के करीब हो जाता है। यह संतुलन साधक की अनेक शारीरिक व मानसिक व्याधियों को स्वत: ही ठीक कर देता है। ध्यान की इस वैज्ञानिक पद्धति की अधिक जानकारी हेतु हमारे हेल्पलाइन नंबर 18002700800 पर कॉल कर सकते हैं ।सहजयोग पूर्णतया नि:शुल्क है।

