अतीत के बंधन से मुक्त एक आनंददायक जीवन का अंगीकरण ही सहजयोग
वर्तमान को दो ही लोग जीते हैं- योगी या भोगी। भोगी वो हैं जो सिर्फ और सिर्फ सांसारिक सुख के लिए जीते हैं। धन कमाना और विलासी जीवन जीना ही उनका उद्देश्य होता है। कालखंड में यदि समय का विभाजन करें तो सबसे कम समय हम वर्तमान में जीते हैं। वर्तमान को जीते समय भी यदि भूतकाल हावी रहे तो इसे वर्तमान में जीना नहीं कहेंगे। जैसे ही हम वर्तमान में जीना शुरु करते हैं, भविष्य से हम स्वयंमेव ही जुड़ जाते हैं। वर्तमान ही हमारे भविष्य का निर्धारण करता है। भूतकाल की सफलता पर इतराते रहने मात्र से या असफलता पर खीजने से वर्तमान के साथ भविष्य भी दुष्कर हो जाता है।
हमारी शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए यदि हम अपना दैनंदिन कार्य करेंगे तब इसे वर्तमान में स्थित होना कहा जायेगा।
वर्तमान में स्थित रहने की कला यदि सीख लें तो हम योगी बनेंगे अन्यथा एक भोगी सा जीवन जीने को विवश होंगे। इसीलिए दार्शनिकों, विद्वानों, साधु-संतों ने कहा है अतीत को छोड़ो, वर्तमान को पकड़ो और भविष्य से अपने आपको जोड़ो।
सिर्फ कुछ सालों का नहीं बल्कि जन्म जन्मांतरण के भूतकाल का दुष्प्रभाव हमारे अचेतन में विद्यमान रहता है, जो वर्तमान को बाधित करता है। भूतकाल के प्रभाव या दुष्प्रभाव से कैसे मुक्त हो, यही हम आपको बताना चाहते हैं।
भूतकाल को छोड़ पाना सहज योग के माध्यम से बेहद आसान है। हमारे शरीर में स्थित तीन नाड़ियों में बाईं ओर ईड़ा (भूतकाल की नाड़ी) , दाहिनी ओर पिंगला (भविष्य की नाड़ी) और मध्य में सुषुम्ना (वर्तमान की नाड़ी) है। इन नाड़ियों को बैलेंस करने में पंचतत्व हमारी मदद करते हैं। पंचतत्व की शक्ति का आभास सहज योग ध्यान से तत्काल हो जाता है। ईड़ा नाड़ी को धरती तत्व संतुलित करता है और हमें वर्तमान में स्थित कर देता है। कैसे? इसे सीखने के लिए हमें आत्मसाक्षात्कार लेना होगा। अत: जल्द से जल्द सहज योग से जुड़े और स्वयं को भूतकाल के बंधन से मुक्त कर एक आनंददायक जीवन अंगीकार करे।
सहज योग पूर्णतया निशुल्क है| अपने आत्म साक्षात्कार को प्राप्त करने हेतु अपने नज़दीकी सहजयोग ध्यान केंद्र की जानकारी टोल फ्री नंबर 1800 2700 800 अथवा यूट्यूब चैनल लर्निंग सहजयोगा से प्राप्त कर सकते हैं।

