भौतिकता से परे जाने का मार्ग है सहज योग
भौतिकता (Materialism) से परे जाने का मार्ग आंतरिक चेतना के विकास, ध्यान, नि:स्वार्थ कर्म और अध्यात्म के माध्यम से आत्मज्ञान प्राप्त करना है। यह भौतिक सुख-सुविधाओं से ऊपर उठकर करुणा, प्रेम, और शाश्वत सत्य से जुड़ने की निरंतर प्रक्रिया है, जो व्यक्ति की अपनी पहचान को देह-बुद्धि से परे आत्मा के साथ स्थापित करने के लिए प्रेरित करती है।
नियमित ध्यान (Meditation) से मन शांत होता है और भौतिक आकर्षणों से दूर होकर अपने भीतर की चेतना को पहचानें में समर्थ होता है। भक्ति मार्ग पर पूजा, दान दक्षिणा, हवन व भजन मार्ग से भी मन शांत होता है, पर भौतिक आकर्षण से पूर्ण रुपेण तटस्थ होने के लिए सहज योग ध्यान निश्चित ही फलदायी है। नियमित सरल विधि से की जाने वाली ध्यान धारणा बहुत सहजता से हममें सद्गुण प्रस्थापित करती है।
सहज योग ध्यान परमपूज्य श्री माताजी निर्मला देवी द्वारा 1970 में स्थापित एक अनूठी, सहज और निःशुल्क प्रक्रिया है, जो रीढ़ की हड्डी के आधार में सुप्त कुंडलिनी ऊर्जा को जगाकर आत्म-साक्षात्कार प्रदान करती है। यह 'विचारहीन जागरूकता' (thoughtless awareness) की स्थिति लाता है, जो शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक संतुलन को बहाल कर तनाव कम करता है। सहज योग माध्यम से कुंडलिनी का जागरण व हमारे सुक्ष्म शरीर के सभी चक्र पर ध्यान हमें अंतर्मन में चैतन्य का प्रकाश भर देता है। हथेलियों से प्रवाहित होते वाइब्रेशन ईश्वर की अनुभूति देते हैं। अपने असंतुलित चक्रों पर कुछ पल के ध्यान से ही हमारे चक्र संतुलित हो जाते हैं।
यह ध्यान की यात्रा हमें बाहरी दिखावे से दूर आंतरिक शांति की ओर ले जाती है, जिसमें सांसारिक सुखों को नकारने के बजाय, उन्हें अपनी चेतना का केंद्र न बनाकर आत्मा की खोज की जाती है।
अध्यात्म का मूल सिद्धांत यही है कि हममें से प्रत्येक वास्तव में एक आत्मा है जो कि थोड़े समय के लिए इस भौतिक शरीर में आई है। हमारे जीवन का उद्देश्य अपनी आत्मा का मिलाप परमात्मा से करना व अपने सर्वोत्तम स्वरूप को पाना है। और, सहज योग इसका सबसे सहज मार्ग है। आत्मसाक्षात्कार को प्राप्त करने हेतु अपने नज़दीकी सहजयोग ध्यान केंद्र की जानकारी टोल फ्री नंबर 1800 2700 800 से प्राप्त कर सकते हैं। सहज योग सदैव नि:शुल्क है।

