आध्यात्म का वैज्ञानिक स्वरूप है सहजयोग ध्यान

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आज का मनुष्य विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति कर चुका है, किंतु मानसिक तनाव, असंतोष और आंतरिक अशांति जैसी समस्याएँ निरंतर बढ़ रही हैं। ऐसे समय में सहजयोग ध्यान एक ऐसी वैज्ञानिक आध्यात्मिक पद्धति के रूप में सामने आता है, जो व्यक्ति को स्वयं के भीतर स्थित दिव्य चेतना से जोड़कर जीवन में संतुलन, शांति और आनंद का अनुभव कराता है।
सहजयोग की प्रणेता परम पूज्य श्री माताजी निर्मला देवी के अनुसार, मनुष्य सृष्टि की सर्वोत्तम रचना है, क्योंकि केवल उसी के भीतर परम चेतना के जागरण की क्षमता विद्यमान है। यही जागरण अध्यात्म का वास्तविक उद्देश्य है। अध्यात्म का लक्ष्य किसी मत या पंथ का प्रचार नहीं, बल्कि मनुष्य के भीतर छिपी दिव्य शक्तियों और सद्गुणों का विकास करना है, ताकि वह ईश्वर की अनुभूति प्राप्त कर अपने जीवन में प्रेम, करुणा और पवित्रता का संचार कर सके।
विज्ञान जहाँ प्रकृति और पदार्थ के रहस्यों को समझकर मानव जीवन को सुविधाजनक बनाता है, वहीं अध्यात्म मनुष्य के आंतरिक जीवन को समृद्ध और संतुलित करता है। सापेक्षता सिद्धांत के जनक अल्बर्ट आइंसटीन ने भी कहा था कि विज्ञान और अध्यात्म एक-दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि पूरक हैं। उनके अनुसार, इस सृष्टि के अद्भुत रहस्यों के पीछे एक दिव्य चेतना कार्यरत है।
चिकित्सा विज्ञान हमें शरीर की संरचना और उसके अंगों की जानकारी देता है, वहीं आत्मसाक्षात्कारी योगी अनुभव करता है कि इस स्थूल शरीर के भीतर एक सूक्ष्म तंत्र भी विद्यमान है। यह सूक्ष्म शरीर नाड़ियों और चक्रों से निर्मित है, जिनके माध्यम से परम चेतना का प्रवाह होता है। सहजयोग ध्यान इसी सूक्ष्म तंत्र को जागृत कर व्यक्ति को आत्मसाक्षात्कार का प्रत्यक्ष अनुभव कराता है। इस अनुभव के पश्चात ध्यान सहज हो जाता है और व्यक्ति मानसिक शांति, भावनात्मक संतुलन तथा आध्यात्मिक आनंद का अनुभव करने लगता है।
विश्व के 180 से अधिक देशों में लाखों लोग सहजयोग ध्यान का अभ्यास कर रहे हैं और इसके माध्यम से अपने जीवन में सकारात्मक परिवर्तन का अनुभव कर रहे हैं। यह पद्धति पूर्णतः वैज्ञानिक, व्यावहारिक एवं निःशुल्क है। इसमें किसी प्रकार का शुल्क, सदस्यता अथवा अनिवार्य अनुष्ठान नहीं है।
जो भी व्यक्ति आत्मसाक्षात्कार एवं सहजयोग ध्यान का अनुभव करना चाहते हैं, वह अपने निकटतम सहजयोग ध्यान केंद्र की जानकारी टोल-फ्री नंबर 1800-2700-800 अथवा www.sahajayoga.org.in से प्राप्त कर सकते हैं।

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