सहजयोग: आत्मजागरण की ओर यात्रा
विचारहीन जागरूकता का दिव्य अनुभव
वर्तमान से भागना मनुष्य का स्वभाव है। वह या तो भविष्य में जीता है या अतीत में, कभी वर्तमान में नहीं। एक विचार उठता है और फिर गिरता है, फिर उठता है और फिर गिरता है। ध्यान केवल इन विचारों की लहरों के चरम बिंदु पर ही टिका रहता है। विचारों के बीच... इन दो विचारों के बीच एक खाली जगह होती है जिसे "विलंब" कहते हैं। यही वर्तमान है।
लेकिन किसी का भी मस्तिष्क धोकर, यह कहकर कि “वर्तमान में रहो!”…आप ऐसा नहीं कर सकते। इसके लिए कुंडलिनी का जागृत होना आवश्यक है। जब वह जागृत होती है, तब आप विचारहीन जागरूकता में स्थिर हो जाते हैं। लेकिन यह जागरूकता प्रबुद्ध होती है।
कुंडलिनी जागरण के माध्यम से हमारें सभी केंद्र प्रबुद्ध होते हैं, और एक नया आयाम खुल जाता है। कुंडलिनी हमारे भीतर पवित्र आत्मा का प्रतिबिंब है। जब कुंडलिनी आज्ञा चक्र के ऊपर उठती है तो आप विचारहीन रूप से जागरूक हो जाते हैं। और जब यह ब्रह्मरंध्र को भेदती है, तो आप सामूहिक चेतना प्राप्त करते हैं, और आपके हाथों से आत्मा के वाइब्रेशन निकलने लगते हैं, जिसे ठंडी हवा के रूप में महसूस किया जा सकता है, बाइबल में भी इसे कूल ब्रीज़ के रूप में वर्णित किया गया है। यही आत्मसाक्षात्कार प्राप्ति का अनुभव है।
जब यह आत्मसाक्षात्कार घटित होता है, तब मनुष्य अपने वास्तविक स्वरूप को जानने लगता है। उसके भीतर शांति, संतुलन और आनंद का सहज प्रवाह प्रारम्भ हो जाता है। जीवन की समस्याएँ उसे विचलित करने के बजाय सीख और विकास का माध्यम प्रतीत होने लगती हैं। इस जागृत अवस्था में व्यक्ति स्वयं के साथ-साथ दूसरों के प्रति भी अधिक संवेदनशील, करुणामय और प्रेमपूर्ण बन जाता है। यही आंतरिक परिवर्तन मानव जीवन के वास्तविक उद्देश्य की ओर ले जाता है। आइए इस अनुभव का आनंद प्राप्त करने के लिए और अपनी आत्मा का योग परमात्मा से घटित करने के लिए चलिये सहज योग से जुड़ते हैं,
सहजयोग पूर्णतया व सदैव निशुल्क है, आप अपने आत्म साक्षात्कार को प्राप्त करने हेतु अपने नज़दीकी सहजयोग ध्यान केंद्र की जानकारी टोल फ्री नंबर 1800 2700 800 से प्राप्त कर सकते हैं या वेबसाइट www.sahajayoga.org.in पर देख सकते हैं।

