सहजयोग : भ्रम के युग में सत्य का प्रकाश

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परम पूज्य श्री माताजी निर्मला देवी द्वारा वर्ष 1970 में स्थापित सहजयोग ध्यान आज विश्व के 180 से अधिक देशों में आत्मसाक्षात्कार, आंतरिक शांति और आध्यात्मिक जागरण का सशक्त माध्यम बन चुका है। सहजयोग एक जीवंत, वैज्ञानिक एवं अनुभव-आधारित ध्यान पद्धति है, जिसमें प्रत्येक व्यक्ति के भीतर स्थित कुंडलिनी शक्ति का सहज जागरण होकर आत्मसाक्षात्कार की प्राप्ति होती है। यह आत्मसाक्षात्कार केवल एक आध्यात्मिक अवधारणा नहीं, बल्कि चैतन्य की शीतल दिव्य अनुभूति के रूप में प्रत्यक्ष अनुभव किया जा सकता है। नियमित सहजयोग ध्यान से व्यक्ति के मानसिक तनाव, भय, क्रोध और असंतुलन में कमी आती है तथा उसके व्यक्तित्व में प्रेम, करुणा, संतुलन, विवेक और आत्मविश्वास का स्वाभाविक विकास होता है। आज विश्वभर में लाखों साधक सहजयोग के माध्यम से आध्यात्मिक, मानसिक, शारीरिक, सामाजिक एवं पारिवारिक जीवन में सकारात्मक परिवर्तन का अनुभव कर रहे हैं।
श्री माताजी अपनी अमृतवाणी में स्पष्ट करती हैं कि वर्तमान कलियुग केवल भ्रम और संघर्ष का युग नहीं, बल्कि सत्य की खोज और आत्मसाक्षात्कार का सर्वश्रेष्ठ अवसर है। वे कहती हैं कि जब मनुष्य संसार के असत्य, असंतोष और भ्रम को पहचान लेता है, तभी उसके भीतर सत्य को जानने की वास्तविक जिज्ञासा जागृत होती है और वहीं से उसकी आध्यात्मिक यात्रा प्रारंभ होती है। श्री माताजी 'दमयंती पुराण' का उल्लेख करते हुए बताती हैं कि कलियुग का वास्तविक महत्व इसी में है कि भ्रम के अनुभव के पश्चात मनुष्य सत्य की ओर अग्रसर होगा और अंततः आत्मसाक्षात्कार प्राप्त करेगा। कलि स्वयं राजा नल से कहता है कि उसके समय में लोग भ्रमित अवश्य होंगे, किंतु उसी भ्रम से जागृत होकर वे सत्य की खोज करेंगे और दिव्य ज्ञान को प्राप्त करेंगे। हजारों वर्ष पूर्व कही गई यह भविष्यवाणी आज सहजयोग के माध्यम से साकार होती दिखाई देती है, जहाँ विभिन्न धर्मों, संस्कृतियों और देशों के लोग बिना किसी बाहरी परिवर्तन के अपने भीतर स्थित दिव्य चेतना का अनुभव कर रहे हैं।
सहजयोग का संदेश है कि आध्यात्मिक उत्थान के लिए संसार का त्याग आवश्यक नहीं, बल्कि गृहस्थ जीवन में रहते हुए भी आत्मसाक्षात्कार प्राप्त किया जा सकता है। यह किसी धर्म, संप्रदाय या मत-विशेष तक सीमित नहीं, बल्कि सम्पूर्ण मानवता के लिए एक सार्वभौमिक आध्यात्मिक प्रक्रिया है, जो प्रत्येक व्यक्ति के भीतर विद्यमान दिव्य शक्ति को जागृत कर उसे स्वयं के वास्तविक स्वरूप से परिचित कराती है। सहजयोग ध्यान पूर्णतः निःशुल्क है और इसका उद्देश्य मानव जीवन में शांति, संतुलन, नैतिकता तथा विश्वबंधुत्व की स्थापना करना है।
निकटतम सहजयोग ध्यान केंद्र की जानकारी टोल-फ्री नंबर 1800 2700 800   अथवा www.sahajayoga.org.in से  प्राप्त कर सकते हैं।

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