10 साल से नहीं बढ़ा वेतन और न मातृत्व अवकाश व्यावसायिक प्रशिक्षकों ने सहायक श्रमायुक्त से लगाई गुहार

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दिव्यानंद अर्गल 
ग्वालियर। मध्यप्रदेश के शासकीय विद्यालयों में कार्यरत व्यावसायिक प्रशिक्षकों ने वेतनमान, सामाजिक सुरक्षा और सेवा संबंधी विभिन्न समस्याओं को लेकर सहायक श्रम आयुक्त, ग्वालियर को ज्ञापन सौंपा। प्रशिक्षकों ने बताया कि स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा आउटसोर्स व्यवस्था के माध्यम से प्रदेशभर में लगभग 6000 व्यावसायिक प्रशिक्षक पिछले 10 वर्षों से सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन इस दौरान उनके वेतनमान में किसी प्रकार की वृद्धि नहीं की गई है।
प्रशिक्षकों का कहना है कि वर्तमान में उन्हें मात्र 20 हजार रुपये मासिक मानदेय दिया जा रहा है, जो बढ़ती महंगाई और उनकी शैक्षणिक एवं तकनीकी योग्यता के अनुरूप नहीं है। ज्ञापन में अन्य राज्यों की तर्ज पर 38 हजार से 42 हजार रुपये प्रतिमाह वेतनमान निर्धारित करने तथा प्रतिवर्ष कम से कम 5 प्रतिशत वेतनवृद्धि लागू करने की मांग की गई है।
ज्ञापन में ईपीएफ, ईएसआई, दुर्घटना बीमा और अन्य सामाजिक सुरक्षा सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई। महिला व्यावसायिक प्रशिक्षकों ने सवेतन मातृत्व अवकाश नहीं मिलने का मुद्दा भी श्रम विभाग के समक्ष रखा। उनका कहना है कि मातृत्व अवकाश लेने पर कंपनियों द्वारा वेतन काट लिया जाता है, जबकि श्रम कानूनों के अनुसार यह कामकाजी महिलाओं का अधिकार है। इसके अलावा प्रशिक्षकों ने आकस्मिक अवकाश (सीएल) और चिकित्सीय अवकाश (एमएल) की समुचित व्यवस्था लागू करने तथा पूर्व में मिलने वाले एक आकस्मिक अवकाश को पुनः बहाल करने की मांग की।
प्रशिक्षकों ने यह भी आरोप लगाया कि विद्यालयों में उनकी उपस्थिति वीटी मैनपावर एप के माध्यम से दर्ज की जाती है। कई बार तकनीकी कारणों से उपस्थिति दर्ज नहीं हो पाती, जिसके चलते संबंधित दिवस का वेतन काट लिया जाता है। विद्यालय प्राचार्य द्वारा उपस्थिति प्रमाणित किए जाने के बावजूद उसे मान्यता नहीं दी जाती। इसके अलावा प्रत्येक शैक्षणिक सत्र समाप्त होने पर बिना किसी पूर्व सूचना के सेवा में कृत्रिम ब्रेक दिए जाने से भी प्रशिक्षकों को आर्थिक और मानसिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
व्यावसायिक प्रशिक्षकों का कहना है कि वे प्रदेश के विद्यार्थियों को रोजगारोन्मुखी और कौशल आधारित शिक्षा प्रदान कर रहे हैं तथा कौशल विकास अभियान की महत्वपूर्ण कड़ी हैं। इसके बावजूद उन्हें सम्मानजनक वेतन और बुनियादी सुविधाओं से वंचित रखा जा रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि लंबे समय से मांगों की अनदेखी होने से अस्थायी कर्मचारियों में असंतोष बढ़ रहा है।
प्रशिक्षकों ने सहायक श्रम आयुक्त से मांग की कि उनकी समस्याओं का शीघ्र निराकरण कर आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए जाएं, ताकि उन्हें सम्मानजनक कार्य वातावरण और श्रम कानूनों के अनुरूप सुविधाएं प्राप्त हो सकें।

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