इस वर्ष की दूसरी नेशनल लोक अदालत

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रिपोर्टर :- सलीम हुसैन 
झाबुआ।  झाबुआ में 9 मई को  द्वितीय नेशनल लोक अदालत का आयोजन किया गया। जिला न्यायालय परिसर झाबुआ में प्रातः 10ः30 बजे प्रधान जिला न्यायाधीश महोदया आशिता श्रीवास्तव, न्यायाधीशगण एवं अधिवक्तागणों के द्वारा मां सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्जवलित कर नेशनल लोक अदालत का शुभारंभ किया गया।    
   इस अवसर पर प्रथम जिला न्यायाधीश प्रकाश केरकेट्टा, द्वितीय जिला न्यायाधीश राकेश कुमार पाटीदार, मुख्य न्यायिक मजिस्टेªट नितिन कुमार मुजाल्दा, न्यायिक मजिस्टेªट सरोज बाला मुजाल्दा, जिविसेप्रा झाबुआ के सचिव शिव कुमार डावर, न्यायिक मजिस्टेªट  श्रद्धा पटेल, जिला विधिक सहायता अधिकारी जयदेव माणिक, अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष दीपक भण्डारी सम्मानीय अधिवक्तागण, विभिन्न विभागों के अधिकारीगण, न्यायालयीन कर्मचारीगण, खण्डपीठ सदस्यगण एवं पक्षकारगण उपस्थित रहें।
   शुभारंभ अवसर पर प्रधान जिला न्यायाधीश एवं अध्यक्ष श्रीमती आशिता श्रीवास्तव ने अपने उद्बोधन में कहा कि नेशनल लोक अदालत न्याय व्यवस्था का वह मानवीय चेहरा है, जहां जीत किसी एक पक्ष की नहीं, बल्कि न्याय और सौहार्द की होती है। न्यायालयों में लंबित प्रकरणों का बोझ कम करने के लिए लोक अदालत एक मील का पत्थर है। यहां न कोई हारता है और न कोई जीतता है, बल्कि दोनों पक्ष आपसी सहमति से एक ऐसे समाधान पर पहुंचते हैं जो स्थायी होता है। लोक अदालत के माध्यम से होने वाले समझौतों की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इनके विरुद्ध कोई अपील नहीं होती, जिससे विवादों का हमेशा के लिए अंत हो जाता है। उन्होंने कहा कि हमारे न्यायाधीशों और अधिवक्ताओं का यह सामूहिक प्रयास होना चाहिए कि आज कोई भी पक्षकार यहां से निराश होकर न जाए, बल्कि एक मुस्कुराहट और समाधान के साथ घर लौटे।     
   न्यायालय परिसर में दिनभर चली नेशनल लोक अदालत में विद्युत विभाग, बैंक, नगर पालिका, बी.एस.एन.एल. विभाग हेतु लगे स्टॉलो पर पक्षकारों की राजीनामा के लिए चर्चा करने के लिए पक्षकारगण उपस्थित रहें। 
   14 खण्डपीठों में न्यायालय के कुल समझौता योग्य 338 प्रकरणों का निराकरण हुआ जिसमें अवार्ड राशि 23822517/- रूपये प्राप्त हुये एवं प्रीलिटिगेशन में कुल 326 प्रकरणों का निराकरण होकर अवार्ड राशि 5474591/- रूपये पारित हुई। इस प्रकार न्यायालय एवं प्रीलिटिगेशन के कुल 664 प्रकरणों का निराकरण सफलतापूर्वक हुआ। लोक अदालत के माध्यम से कई पक्षकारों के मध्य आपसी मधुर संबंध स्थापित हुये।
  सभी अधिवक्ता, लोक अदालत के खण्डपीठ के सदस्य, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के कर्मचारी एवं न्यायालयीन कर्मचारियों का भी सराहनीय सहयोग रहा।

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