आत्मसाक्षात्कार : परमात्मा के अंतिम आशीर्वाद को पाने की ओर पहला कदम
परमपिता परमेश्वर ने इस सृष्टि की रचना के बाद अपनी सबसे सुंदर कृति बनाई — मानव। परमात्मा ने मनुष्य को अपना प्रतिबिंब मानकर उसे फल, फूल, अन्न, सुंदर प्रकृति, बुद्धि, धन-दौलत और अनेक आशीर्वाद दिए।
अब केवल एक अमूल्य आशीर्वाद शेष था — “निर्विचार अवस्था” के बाद प्राप्त होने वाली अमृतमयी मनःशांति। परंतु परमात्मा ने सोचा कि यदि यह भी मानव को सहज ही मिल जाए, तो वह परमात्मा को भूलकर केवल भौतिक सुखों में खो जाएगा।
परमपूज्य श्री माताजी प्रणीत सहजयोग हमें उसी परम प्रेम, करुणा और शांति की ओर ले जाता है, लेकिन हम भौतिक माया में उलझे हुए हैं। श्री माताजी ने कहा है कि धन और भौतिकता मनुष्य को उसके सूक्ष्म अस्तित्व से दूर कर देते हैं।
भौतिकता व धन दोनों ही इस भौतिक संसार के लिए आवश्यक चीज हैं परंतु उतनी ही मात्रा में जो आपके जीवन यापन को सुगम बना सके । यदि आप पूर्ण रूप से वस्तुओं के अधीन हो जाते हैं, अपने व अपने निर्माता परमपिता दोनों ही के अस्तित्व को भुलाकर मात्र वस्तु बनकर रह जाते हैं तब निराशा, तनाव, अशांति, उदासी व अवसाद आपके जीवन के अंग बन जाते हैं। और परमात्मा का अंतिम आशीर्वाद जो हमें स्वयं अपने प्रयासों से प्राप्त करना होगा ही इन परिस्थितियों का उपचार होता है।
परमपूज्य श्री माताजी कहती हैं कि जब तक मनुष्य आत्मसाक्षात्कार प्राप्त कर अपने चित्त और आत्मा को एकाकार नहीं करता, तब तक उसे सच्चा प्रेम, आनंद और संतोष नहीं मिल सकता।
लेकिन आत्मसाक्षात्कार के बाद जब मनुष्य उस अमृतमयी मनःशांति का अनुभव करता है, तब उसके हृदय से केवल यही भाव निकलता है —
“हे परमेश्वर! आपकी अहैतुकी कृपा के लिए हम सदा आपके ऋणी रहेंगे।”
सहजयोग पूर्णतया निशुल्क है । सहजयोग से संबंधित जानकारी टोल फ्री नं – 1800 2700 800 से प्राप्त कर सकते हैं।

