वार्ड 34 में सरकारी पानी की टंकी से निजी मल्टियों में पानी बेचने के गंभीर आरोप; नगर निगम की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
इंदौर। शहर के वार्ड क्रमांक 34, न्यू लोहामंडी–देवास नाका क्षेत्र में नगर निगम की सरकारी पानी की टंकी से पानी भरकर निजी मल्टियों में व्यावसायिक दामों पर बेचे जाने का मामला सामने आया है। स्थानीय स्तर पर मिल रही शिकायतों और नागरिकों के हवाले से लगाए जा रहे आरोपों के अनुसार, 'महाकाल वाटर सप्लायर' (जिसके संचालक के रूप में संदीप निगम और सचिन निगम के नाम सामने आ रहे हैं) द्वारा सरकारी जलस्रोत से टैंकर भरकर निजी कॉलोनियों और इमारतों में पानी की सप्लाई की जा रही है।
आरोप है कि इसी व्यवस्था के तहत 'हॉरिजन ओएसिस ग्रीन' (Horizon Oasis Green) मल्टी में भी पानी निजी तौर पर बेचा जा रहा है। स्थानीय नागरिकों का सवाल है कि यदि यह पानी नगर निगम के सार्वजनिक जलस्रोत से निकाला जा रहा है, तो क्या इसकी कोई आधिकारिक अनुमति है और यदि नहीं, तो इस व्यावसायिक उपयोग पर रोक क्यों नहीं लगाई जा रही?
भागीरथपुरा की घटना के बाद भी व्यवस्था पर सवाल
शहर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी की आपूर्ति से हुई गंभीर दुर्घटनाओं और जनहानि के बाद सुरक्षित पेयजल व्यवस्था को लेकर नगर निगम की जवाबदेही पर बड़े सवाल खड़े हुए थे। उस संवेदनशील घटना के बाद भी यदि शहर के किसी हिस्से में सरकारी जलसंसाधन का उपयोग निजी मुनाफे के लिए किए जाने के आरोप लग रहे हैं, तो यह सीधे तौर पर प्रशासनिक लापरवाही और लचर निगरानी को उजागर करता है। एक तरफ आम नागरिक शुद्ध पेयजल के लिए संघर्ष कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ सरकारी संपत्तियों के व्यावसायिक दोहन की चर्चाएं स्थानीय स्तर पर रोष पैदा कर रही हैं।
जांच के प्रमुख बिंदु
स्थानीय नागरिकों द्वारा इस पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच की मांग की जा रही है। जांच के दायरे में निम्नलिखित मुख्य बिंदु शामिल होने चाहिए:
अनुमति की वैधता: क्या महाकाल वाटर सप्लायर के पास सरकारी टंकी से पानी भरने और उसे बेचने का कोई वैध अनुबंध या प्रशासनिक अनुमति है?
टैंकरों के आवाजाही के रिकॉर्ड: टंकी परिसर में तैनात कर्मचारियों की संलिप्तता, टैंकरों के वाहन नंबर, पानी भरने के समय और मात्रा का क्या रिकॉर्ड रखा जाता है?
CCTV फुटेज: टंकी पर लगे सुरक्षा कैमरों की रिकॉर्डिंग से टैंकरों के आने-जाने के समय की पुष्टि की जानी चाहिए।
वित्तीय लेन-देन: पानी की इस कथित व्यावसायिक बिक्री से होने वाली आय किसके खातों में जा रही है, इसकी वित्तीय जांच होनी चाहिए।
अखबार की ओर से आवश्यक नोट एवं विधिक स्पष्टीकरण:
इस समाचार में प्रकाशित सभी आरोप पूरी तरह से स्थानीय नागरिकों और शिकायतकर्ताओं के बयानों/दावों पर आधारित हैं। अखबार या संवाददाता इनकी पुष्टि स्वतः नहीं करता है, यह जांच का विषय है।
इस संबंध में जब महाकाल वाटर सप्लायर के संचालकों (संदीप निगम व सचिन निगम), हॉरिजन ओएसिस ग्रीन प्रबंधन, तथा संबंधित नगर निगम अधिकारियों का पक्ष जानने का प्रयास किया गया, तो समाचार लिखे जाने तक उनका आधिकारिक वक्तव्य प्राप्त नहीं हो सका है। संबंधित पक्षों का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी आगामी अंक में उचित प्रमुखता के साथ प्रकाशित किया जाएगा।

