शिशुपाल जी! शिकायत हुई तो नींद खुली, वरना स्टॉप डैम फाइलों में ही बहता रहता?"

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पहले पोर्टल पर 'कार्य प्रगति पर', अब जवाब में 'काम पूरा'... आखिर सच कौन बोल रहा है?"
सूर्या परमार शुजालपुर 
शुजालपुर। ग्राम पंचायत धनाना का स्टॉप डैम अब सिर्फ निर्माण का नहीं, बल्कि सरकारी दावों और जमीनी हकीकत के टकराव का मामला बनता जा रहा है। शिकायत दर्ज होने के बाद उपयंत्री शिशुपाल भदोरिया ने जवाब दिया कि कोई नया चेक डैम नहीं बना, बल्कि पुराने स्टॉप डैम को लगभग ₹49 हजार की लागत से चेक डैम में परिवर्तित कर दिया गया।

लेकिन शिशुपाल जी, एक सवाल तो बनता है...
जब शिकायत दर्ज हुई थी और मौके पर कार्य दिखाई नहीं दे रहा था, तब आपकी तकनीकी नजर आखिर कहां थी? क्या निरीक्षण सिर्फ शिकायत आने के बाद ही होता है? या फिर पहले कागज चलते हैं और बाद में काम?

पंचायत दर्पण पर पहले "कार्य प्रगति पर" लिखा गया। अब वही विभाग कह रहा है कि काम हो चुका है। आखिर जनता किस बात पर भरोसा करे—पोर्टल पर या प्रतिवेदन पर?

यदि ₹49 हजार का कार्य वास्तव में हुआ है तो माप पुस्तिका (MB), कार्य पूर्णता प्रमाण पत्र, तकनीकी निरीक्षण रिपोर्ट, भुगतान विवरण और मौके के पहले व बाद के फोटो सार्वजनिक क्यों नहीं किए जाते? आखिर सरकारी पैसे से हुए काम को छिपाने की जरूरत किसे है?

सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या शिकायत के बाद रिकॉर्ड को सही ठहराने की कोशिश हो रही है, या फिर वास्तव में समय पर कार्य हुआ था? यदि काम समय पर हुआ था, तो उस समय उसका रिकॉर्ड और प्रमाण सामने क्यों नहीं आए?

अब निगाहें जनपद पंचायत और जिला प्रशासन पर हैं। क्या पूरे मामले की स्वतंत्र तकनीकी जांच होगी, या फिर सिर्फ एक प्रतिवेदन के सहारे फाइल बंद कर दी जाएगी?

बड़ा सवाल 

शिशुपाल जी, अगर सब कुछ नियम के अनुसार हुआ था, तो शिकायत के बाद ही जवाब क्यों आया? और अगर काम पहले से था, तो जनता को वह मौके पर पहले क्यों नहीं दिखा? आखिर सच्चाई कागजों में है या जमीन पर?

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