स्लीमनाबाद टनल कटनी, रीवा, सतना, मैहर और पन्ना जिलों के लिए बनेगी अमृतधारा : मुख्यमंत्री डॉ यादव

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इन पांच जिलों के कुल ढाई लाख हेक्टेयर सिंचाई का रकबा बढ़ेगा
प्रधानमंत्री श्री मोदी का मुख्यमंत्री डॉ यादव ने माना आभार
1600 करोड़ रुपये से अधिक की राशि से बनी 12 किलोमीटर लंबी टनल परियोजना
किसानों और व्यापारियों के लिए वरदान सिद्ध होगी स्लीमनाबाद टनल
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने टनल के अवलोकन के बाद स्लीमनाबाद में की प्रेस वार्ता
कटनी से जिला ब्यूरो नवल किशोर 
कटनी  । मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि विंध्य क्षेत्र हर प्रकार के संसाधनों से समृद्ध है, लेकिन कुछ स्थानों पर पानी की कमी की चुनौती सामने आती है। स्लीमनाबाद टनल कटनी, रीवा, सतना, मैहर और पन्ना जिलों के लिए अमृतधारा बनेगी। भगवान श्रीराम के आशीर्वाद से चित्रकूट क्षेत्र और विंध्य की वैली के इन पांच जिलों के कुल ढाई लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई का रकबा बढ़ेगा। लोगों के लिए पेयजल की समस्या का समाधान होगा। कई स्थानों पर इसमें बिजली भी बनाई जाएगी। यह परियोजना राज्य में सिंचाई का रकबा बढ़ाने के संकल्प की पूर्ति में निर्णायक भूमिका निभाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेशवासियों की ओर से टनल परियोजना के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि परियोजना के लिए 1600 करोड़ रुपए की राशि में केंद्र सरकार ने लगभग 275 करोड़ की राशि प्रदान की। राज्य सरकार की प्रतिबद्धता के बलबूते आज यह चुनौतीपूर्ण टनल परियोजना पूरी होने की ओर बढ़ रही है। किसानों और क्षेत्र के व्यापारियों के लिए यह टनल एक वरदान की तरह है। लगभग 12 किलोमीटर लंबी यह परियोजना भविष्य में इंजीनियरिंग के क्षेत्र में केस स्टडी सिद्ध होगी। भीषण भूकंप आने पर भी टनल 100 साल तक सुरक्षित रहेगी। कई स्थानों पर टनल की गहराई जमीन से नीचे 120 फीट तक भी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्लीमनाबाद टनल के अवलोकन के बाद मीडिया से चर्चा में यह जानकारी दी।

मां नर्मदा, गंगा बेसिन में भी हरियाली लाएंगी
मुख्यमंत्री डॉ यादव ने कहा कि नर्मदा नदी तो खंभात की खाड़ी में जाकर मिलती है, लेकिन यह विज्ञान का चमत्कार ही है कि अब मां नर्मदा इस ऐतिहासिक टनल के माध्यम से गंगा बेसिन में सोन नदी के आसपास के अंचल में भी हरियाली लाएगी। एक समय ऐसा भी आया जब लगा कि टनल तैयार होना असंभव जैसा है। लेकिन जब संकल्प बड़ा होता है और पवित्र मन से कार्य किया जाए तो सफलता निश्चित रूप से मिलती है। बार-बार कठिन चट्टानों की चुनौतियां आने के बावजूद नर्मदा टनल को पूरा करने के संकल्प के साथ पूरी टीम काम करती रही। राज्य में एक समय पर सिंचाई का रकबा केवल साढ़े 7 लाख हेक्टेयर था। हमारी सरकारों में यह रकबा बढ़ाकर 44 लाख हेक्टेयर हुआ, जो पिछले ढाई साल में बढ़ाकर 65 लाख हेक्टेयर हो गया है। किसान कल्याण वर्ष में नर्मदा टनल परियोजना किसानों के लिए बड़ी सौगात है। आगामी तीन माह में रबी की फसल के लिए किसानों को एक लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध हो जाएगा।

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