तनाव आज अनेक बीमारियों की जड़ बन चुका है, ऐसे में सकारात्मक सोच और राजयोग ध्यान बहुत जरूरी- ब्रह्माकुमारी शोभा दीदी
धर्मेन्द्र गुप्ता की रिपोर्ट
विदिशा। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय चर्च वाली गली में बरेठ रोड स्थित सेवा केंद्र में सिंगरौली से राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी शोभा दीदी, बीके अंजू दीदी, प्रियंका बहन, जबलपुर से केसरी प्रसाद पांडे, भोपाल से ब्रह्माकुमार दीपेंद्र भाई जी का आगमन हुआ जिनके सान्निध्य में “हीलिंग फ्रॉम विदिन” विषय पर एक भव्य एवं प्रेरणादायी कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में आंतरिक शांति, मानसिक सशक्तिकरण तथा आत्मिक उपचार (हीलिंग) पर गहन मार्गदर्शन प्रदान किया गया। बी.के. शोभा दीदी ने अपने उद्बोधन में कहा कि वर्तमान समय के तमोप्रधान वातावरण में मन को सशक्त बनाकर ही वास्तविक हीलिंग संभव है। उन्होंने कहा, “जैसे माता-पिता अपने बच्चों की सहायता के लिए सदैव तत्पर रहते हैं, वैसे ही परमात्मा भी हमारी सहायता के लिए सदैव उपलब्ध हैं। प्रश्न यह है कि हम स्वयं परमात्मा से कितना जुड़ते हैं।” आज विश्व में व्याप्त दर्द और अशांति से मुक्ति के लिए आंतरिक परिवर्तन और सृष्टि-परिवर्तन की आवश्यकता पर उन्होंने विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि पहले मनुष्य कठिन परिस्थितियों का सामना करते हुए मन और शरीर दोनों से सशक्त था, किंतु आधुनिक साधनों ने जीवन को भले ही सुविधाजनक बनाया हो, मन को कमजोर कर दिया है। तनाव आज अनेक बीमारियों की जड़ बन चुका है। ऐसे में सकारात्मक सोच और राजयोग ध्यान के माध्यम से अपने घर और समाज के वातावरण को परिवर्तित करना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। उदाहरण देते हुए उन्होंने उस चिड़िया की कथा का उल्लेख किया, जो जंगल की आग बुझाने के लिए अपनी चोंच में समुद्र का जल भरकर आग पर डालती है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक आत्मा यदि परमात्मा जो प्रेम, शांति और शक्तियों का सागर हैं से शक्ति लेकर वातावरण में फैलाए, तो क्रोध, चिंता, भय, ईर्ष्या और नकारात्मकता की अग्नि स्वतः शांत होने लगेगी। सिंगरौली से पधारी ब्रह्माकुमारी अंजू दीदी ने दैनिक जीवन में अभ्यास हेतु मार्गदर्शन देते हुए कहा कि सुबह का पहला आधा घंटा स्वयं के लिए निकालें, प्रतिदिन छोटे-छोटे पॉज़ लेकर “मैं आत्मा शांत स्वरूप हूँ” का स्मरण करें, सभी के प्रति शुभ भाव रखें और भोजन-पानी को भी परमात्मा की स्मृति में ग्रहण करें। उन्होंने राजयोग ध्यान को आंतरिक प्यूरीफायर बताते हुए इसे सीखने का आग्रह किया। ब्रह्माकुमार दीपेंद्र भाई जी ने कहा की वर्तमान समय अनेकता के कारण वह स्नेह, आपसी सद्भावना, प्यार, विश्वास और बंधुत्व की भावना बदलती जा रही है। उसकी जगह स्वार्थ, अविश्वास, घृणा, नफरत, बदले की भावना और नकारात्मकता ने अपना स्थान ले लिया है। अगर हमें फिर से वही पुरानी एकता और विश्वास की संस्कृति को लाना है तो आध्यात्मिक ज्ञान और राजयोग का सहारा लेना होगा। संचालिका बी.के. रुक्मणी दीदी ने सभी अतिथियों एवं सहभागियों का स्नेहपूर्ण स्वागत किया। कार्यक्रम के अंत में राजयोग मेडिटेशन की संक्षिप्त कमेंट्री द्वारा उपस्थित जनसमूह को गहन शांति का अनुभव कराया गया।

