इंदौर कालानी नगर क्षेत्र की धर्मराज कॉलोनी में नगर निगम की कार्रवाई ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए है
राजेश धाकड़
अवैध निर्माण हटाने पहुंचे भवन अधिकारी के पास फोन कॉल्स की भरमार, सवालों के अधूरे जवाब और जवाबों में टालमटोल—पूरी कार्रवाई पर संदेह की परतें चढ़ती दिखीं।
शहर में जहां बड़े-बड़े भूमाफिया बेखौफ नजर आते हैं, वहीं गरीबों के मकानों पर पोकलेन चलाने की जल्दबाजी समझ से परे है। धर्मराज कॉलोनी की संकरी गलियों में पोकलेन को लाने के लिए मशीन को गली-गली घुमाया गया—मानो कार्रवाई तय थी, बस जगह तलाशनी थी। आखिरकार जैसे-तैसे पोकलेन मौके तक पहुंचा और दीवारें गिरा दी गईं।
यह कार्रवाई जोन क्रमांक-20 के भवन अधिकारी वैभव देवलासे के नेतृत्व में हुई। गौरतलब है कि वैभव देवलासे पूर्व में चंदन नगर बोर्ड से जुड़े एक मामले में निलंबित भी रह चुके हैं। इसके बावजूद इतनी जल्दी और इतनी संवेदनशील जगह पर कार्रवाई के लिए पहुंचना कई सवाल खड़े करता है।
सबसे बड़ा विरोधाभास यह है कि जिन मकानों को अवैध बताया जा रहा है, उनके पास रजिस्ट्री मौजूद है और वर्षों से इंदौर नगर निगम को नियमित भवन कर भी जमा किया जा रहा है। ऐसे में यदि जमीन सरकारी है, तो फिर नगर निगम टैक्स किस आधार पर ले रहा है? इस सवाल पर भवन अधिकारी स्पष्ट जवाब देने से बचते नजर आए।
कार्रवाई के दौरान मानवीय संवेदनाओं की भी अनदेखी हुई। जिस गरीब परिवार की दीवार गिराई गई, उस परिवार की महिला दोनों आंखों से दृष्टिहीन है और गर्भवती भी। बावजूद इसके, बिना वैकल्पिक व्यवस्था और बिना संवेदनशीलता दिखाए उसकी दीवार गिरा दी गई।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि जमीन सच में सरकारी है, तो वर्षों तक टैक्स क्यों लिया गया? और यदि अवैध निर्माण है, तो पहले बड़े अवैध कब्जों पर कार्रवाई क्यों नहीं? कॉलोनीवासियों ने इस कार्रवाई को चयनात्मक बताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है।
अब सवाल साफ हैं—क्या नगर निगम के रिकॉर्ड में जमीन सरकारी है या निजी? क्या टैक्स वसूली की जवाबदेही तय होगी? और क्या कार्रवाई सिर्फ गरीबों तक ही सीमित रहेगी? इन सवालों के जवाब अब प्रशासन को देने होंगे।

