लालपुर स्कूल में ‘पढ़ेगा इंडिया, बढ़ेगा इंडिया’ के दावों की खुली पोल!
बच्चों को पढ़ाया जा रहा पुराना कलेक्टर का नाम, शौचालय पर ताला, बालिका शौचालय में गंदगी और शराब की बोतलें—स्कूल व्यवस्था पर बड़े सवाल
करैरा। सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता और बच्चों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के दावे लगातार किए जाते हैं, लेकिन शासकीय माध्यमिक विद्यालय लालपुर की कथित जमीनी तस्वीर इन दावों पर गंभीर सवाल खड़े करती नजर आ रही है।
यहां सवाल सिर्फ पढ़ाई का नहीं, बल्कि उस बुनियादी व्यवस्था का है जिसे देखकर बच्चों को अनुशासन, स्वच्छता और सही सामान्य ज्ञान सीखना चाहिए।
जिसे वर्तमान बताया जा रहा, वह पुरानी जानकारी?
विद्यालय में बच्चों को सामान्य जानकारी देने के लिए लगाए गए चार्ट में शिवपुरी जिले के कलेक्टर के रूप में पूर्व कलेक्टर रवीन्द्र कुमार चौधरी का नाम प्रदर्शित होने की बात सामने आई है। इसी तरह जिला शिक्षा अधिकारी के रूप में विवेक श्रीवास्तव का नाम दर्ज बताया जा रहा है।
यदि विद्यालय में वास्तव में पुरानी जानकारी ही बच्चों को पढ़ाई जा रही है, तो सवाल उठता है—
क्या विद्यालय में सामान्य ज्ञान का चार्ट भी अपडेट नहीं किया जाता?
बच्चों को बदलते प्रशासनिक पदों और वर्तमान व्यवस्था की सही जानकारी देना भी शिक्षा का हिस्सा है। ऐसे में वर्षों पुरानी अथवा अद्यतन न की गई जानकारी बच्चों के सामने प्रदर्शित होना विद्यालय की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़ा करता है।
शौचालय बना, लेकिन बच्चों के लिए बंद!
विद्यालय की सबसे गंभीर तस्वीर मूलभूत सुविधाओं को लेकर सामने आती है।
बताया गया कि बालक शौचालय पर ताला लगा हुआ है, जबकि बालिका शौचालय में गंदगी और अव्यवस्था दिखाई दी। इतना ही नहीं, वहां शराब की खाली बोतलें पड़े होने का भी दावा किया गया है।
अब सवाल सीधा है—
जब विद्यालय में बच्चों के लिए शौचालय बनाया गया है, तो उस पर ताला क्यों?
और यदि शौचालय का उपयोग हो रहा है तो उसकी नियमित सफाई और निगरानी कौन कर रहा है?
बच्चों को स्वच्छता का पाठ पढ़ाने वाले विद्यालय परिसर में यदि शौचालय ही गंदगी और अव्यवस्था का शिकार हों, तो यह स्थिति निश्चित रूप से गंभीर जांच की मांग करती है।
पानी, सफाई और स्वस्थ वातावरण—कहां हैं ये सुविधाएं?
बच्चों के लिए स्वच्छ पेयजल, साफ-सुथरे शौचालय और स्वच्छ विद्यालय परिसर किसी विलासिता के नहीं, बल्कि बुनियादी जरूरत के विषय हैं।
लेकिन लालपुर विद्यालय को लेकर सामने आई तस्वीर में इन सुविधाओं की स्थिति पर सवाल उठ रहे हैं।
कागजों में सुविधा और धरातल पर अव्यवस्था—क्या यही सरकारी स्कूल की नई तस्वीर है?
अतिरिक्त कक्ष बने, लेकिन हालत देखकर व्यवस्था पर सवाल
विद्यालय परिसर में बने अतिरिक्त कक्षों की स्थिति भी दयनीय बताए जाने से निर्माण और रखरखाव व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न खड़ा होता है।
यदि सरकारी राशि से विद्यालय में भवन और सुविधाएं तैयार की गई हैं, तो उनका नियमित रखरखाव और बच्चों के हित में उपयोग सुनिश्चित करना भी संबंधित जिम्मेदारों की जिम्मेदारी है।
शराब पीकर पढ़ाने के आरोप—क्या होगी जांच?
मामला यहीं खत्म नहीं होता।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि कुछ समय पहले विद्यालय में पढ़ाने वाले कुछ शिक्षक कथित तौर पर विद्यालय परिसर में शराब का सेवन करते थे और कभी-कभी शराब के नशे में बच्चों को पढ़ाने की शिकायतें भी सामने आई थीं।
यह आरोप बेहद गंभीर हैं।
इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है, इसलिए इनकी सत्यता जांच का विषय है। लेकिन यदि ऐसी शिकायतें जिम्मेदार अधिकारियों तक पहुंची थीं, तो क्या उनकी जांच हुई?
क्या कभी विद्यालय का औचक निरीक्षण किया गया?
क्या शिक्षकों की उपस्थिति और कार्यप्रणाली की नियमित निगरानी होती है?
इन सवालों के जवाब अब ग्रामीण और अभिभावक जिम्मेदार विभाग से मांग रहे हैं।
विद्यालय प्रबंधन पर भी निगरानी का सवाल
विद्यालय परिसर की स्थिति देखकर एक बड़ा सवाल यह भी उठता है कि यदि शौचालयों की सफाई, परिसर की व्यवस्था और सूचना-पट्ट तक समय पर अपडेट नहीं हो रहे, तो विद्यालय की नियमित मॉनिटरिंग किस स्तर पर हो रही है?
क्या संबंधित अधिकारी केवल कागजी रिपोर्टों पर भरोसा कर रहे हैं या वास्तव में विद्यालयों का जमीनी निरीक्षण भी किया जा रहा है?
अब जिम्मेदारों से सीधा सवाल
क्या विद्यालय में वर्तमान प्रशासनिक अधिकारियों की सही जानकारी अपडेट की गई है?
बालक शौचालय पर ताला क्यों लगा है?
बालिका शौचालय में गंदगी और शराब की बोतलें कैसे पहुंचीं?
अतिरिक्त कक्षों की बदहाल स्थिति की जिम्मेदारी किसकी है?
विद्यालय परिसर में शराब सेवन के लगाए गए आरोपों की कभी जांच हुई या नहीं?
बच्चों को स्वच्छ पानी और स्वच्छ वातावरण उपलब्ध कराने की व्यवस्था कौन देख रहा है?
विद्यालय की नियमित मॉनिटरिंग आखिर कौन कर रहा है?
सबसे बड़ा सवाल—बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ कब तक?
सरकार शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने और सरकारी विद्यालयों में बच्चों को बेहतर माहौल देने की बात करती है। लेकिन यदि लालपुर जैसे विद्यालय में सही सामान्य जानकारी, स्वच्छ शौचालय, साफ-सफाई और अनुशासित शैक्षणिक वातावरण जैसी बुनियादी चीजों पर ही सवाल खड़े हो जाएं, तो फिर बड़े-बड़े दावों की वास्तविकता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
यह खबर किसी व्यक्ति विशेष को दोषी ठहराने के लिए नहीं, बल्कि उस व्यवस्था से सवाल पूछने के लिए है जिसके भरोसे ग्रामीण अपने बच्चों का भविष्य सौंपते हैं।
अब देखना यह होगा कि संबंधित शिक्षा विभाग इस मामले को महज एक खबर मानकर आगे बढ़ जाता है या लालपुर विद्यालय की जमीनी हकीकत की निष्पक्ष जांच कराकर जिम्मेदारी तय करता है।
शिवपुरी जिला ब्यूरो
हेमंत भार्गव

