पुलिस पर जानलेवा फायरिंग करने वाले आरोपी को न्यायालय ने सुनाई सजा
धारा 307 में 10 वर्ष तथा आयुध अधिनियम में 7 वर्ष का सश्रम कारावास
पत्रकार :- खुशबू श्रीवास्तव
देपालपुर। अपर सत्र न्यायालय, देपालपुर, जिला इंदौर में सत्र प्रकरण क्रमांक 10/2022, अपराध क्रमांक 435/2021, थाना देपालपुर में पुलिस पर जानलेवा हमला कर फायरिंग करने के मामले में न्यायालय द्वारा आरोपी मनोज उर्फ मांगीलाल पिता भैरूलाल गतीजा को दोषी ठहराते हुए विभिन्न धाराओं में सश्रम कारावास एवं अर्थदंड से दंडित किया गया है। न्यायालय द्वारा निर्णय 15 सितंबर 2026 को घोषित किया गया।
अभियोजन की ओर से प्रस्तुत पूरा घटनाक्रम
अभियोजन के अनुसार 20 दिसंबर 2021 को थाना देपालपुर की तत्कालीन थाना प्रभारी निरीक्षक मीना कर्णावत को मुखबिर से सूचना प्राप्त हुई थी कि सनावद (खरगोन) में कुछ दिन पूर्व हत्या कर सोना लूटने वाला आरोपी मनोज, जो रतलामी पल्सर मोटरसाइकिल क्रमांक एमपी 09 वीडब्ल्यू 6299 लेकर क्षेत्र में खड़ा है तथा किसी व्यक्ति का इंतजार कर रहा है। मुखबिर की सूचना को गंभीरता से लेते हुए उप निरीक्षक दीपक राठौर पुलिस बल एवं वाहन के साथ ग्राम बरौदापंथ की ओर पहुंचे। पुलिस टीम जब देपालपुर-बेटमा मार्ग पर पहुंची तो वहां एक संदिग्ध व्यक्ति पल्सर मोटरसाइकिल के साथ खड़ा दिखाई दिया। पुलिस को देखते ही संदिग्ध व्यक्ति मोटरसाइकिल छोड़कर भागने लगा। पुलिसकर्मियों ने उसे रोकने का प्रयास किया और उसका पीछा शुरू किया। इस दौरान आरक्षक 857 राजपाल, आरक्षक 437 राजेश चौहान तथा आरक्षक 3992 सुधीर शर्मा भी उसके पीछे गए। अभियोजन के मुताबिक, पुलिस द्वारा पीछा किए जाने के दौरान आरोपी ने उप निरीक्षक दीपक राठौर को जान से मारने की नीयत से निशाना साधकर दो फायर किए। अचानक हुई फायरिंग से उप निरीक्षक दीपक राठौर नीचे बैठ गए और अपनी जान बचाई। फायरिंग के बाद आरोपी गेहूं के खेत में घुस गया। पुलिस बल तथा ग्रामीणों की सहायता से खेत को चारों ओर से घेर लिया गया। पुलिस द्वारा आरोपी को आत्मसमर्पण करने के लिए ललकारा गया और चेतावनी दी गई कि बाहर नहीं आने पर गोली चलाई जा सकती है। इसके बाद आरोपी दोनों हाथ ऊपर करके गेहूं के खेत से बाहर आया। पुलिसकर्मियों ने उसे पकड़ लिया। तलाशी लेने पर उसके कब्जे से एक पिस्टल बरामद हुई। आरोपी से नाम-पता पूछने पर उसने अपना नाम मनोज उर्फ मांगीलाल पिता भैरूलाल गतीजा, जाति भील, उम्र लगभग 40 वर्ष, निवासी सज्जन मिल के पीछे, बिरियाखेड़ी, जिला रतलाम बताया।

हथियार एवं कारतूस बरामद
अभियोजन के अनुसार आरोपी द्वारा शासकीय कार्य में बाधा डालते हुए पुलिस अधिकारी को जान से मारने की नीयत से देशी पिस्टल से फायरिंग की गई थी। घटना के बाद मौके से हथियार एवं कारतूस संबंधी सामग्री जब्त की गई। घटनास्थल से 3 राउंड, एक मैगजीन तथा 2 खाली खोखे बरामद किए गए। बरामद हथियार एवं कारतूस को परीक्षण के लिए भेजा गया तथा विवेचना के दौरान घटनास्थल का नक्शा तैयार किया गया और संबंधित पुलिसकर्मियों एवं साक्षियों के कथन लेखबद्ध किए गए। जांच के बाद पुलिस ने आरोपी के विरुद्ध अपराध क्रमांक 435/2021 में धारा 307 एवं 353 भारतीय दंड संहिता तथा धारा 25 एवं 27 आयुध अधिनियम, 1959 के तहत प्रकरण दर्ज कर विवेचना पूरी की। विवेचना के दौरान जब्तशुदा आर्टिकल्स की जांच कराई गई। उन्हें परीक्षण के लिए राज्य न्यायालयिक विज्ञान प्रयोगशाला, सिविल लाइन, सागर (म.प्र.) भेजा गया। परीक्षण रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद उसे न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया। सम्पूर्ण अनुसंधान पूर्ण होने के पश्चात पुलिस द्वारा आरोपी के विरुद्ध दिनांक 18 फरवरी 2022 को अभियोग पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया गया। इसके बाद प्रकरण में न्यायिक कार्यवाही प्रारंभ हुई और अभियोजन द्वारा अपने साक्ष्य एवं दस्तावेज न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किए गए।
अभियोजन ने रखे महत्वपूर्ण साक्ष्य
प्रकरण में अभियोजन की ओर से घटना के संबंध में पुलिस अधिकारियों एवं संबंधित साक्षियों के कथन प्रस्तुत किए गए। अभियोजन ने घटना के दौरान पुलिस अधिकारी पर की गई फायरिंग, आरोपी के भागने, पुलिस द्वारा पीछा किए जाने, गेहूं के खेत की घेराबंदी, आरोपी के आत्मसमर्पण तथा उसके कब्जे से हथियार बरामद होने की परिस्थितियों को न्यायालय के समक्ष रखा। इसके साथ ही घटनास्थल से बरामद पिस्टल, कारतूस, मैगजीन एवं खाली खोखों को भी महत्वपूर्ण भौतिक साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत किया गया। न्यायालय के रिकॉर्ड में प्रकरण से संबंधित एफएसएल परीक्षण रिपोर्ट भी प्रस्तुत की गई।
न्यायालय ने माना अपराध सिद्ध
प्रकरण में उपलब्ध मौखिक एवं दस्तावेजी साक्ष्यों तथा अन्य सामग्री के परीक्षण के बाद न्यायालय ने आरोपी मनोज उर्फ मांगीलाल को दोषी ठहराते हुए विभिन्न धाराओं में दंडित किया।
आरोपी को मिली सजा
धारा 307 भादंवि — 10 वर्ष का सश्रम कारावास एवं ₹5,000 अर्थदंड। अर्थदंड अदा नहीं करने पर 1 वर्ष का अतिरिक्त सश्रम कारावास। धारा 353 भादंवि — 1 वर्ष का सश्रम कारावास एवं ₹500 अर्थदंड। अर्थदंड अदा नहीं करने पर 3 माह का अतिरिक्त सश्रम कारावास। धारा 25(1- बी)(ए) आयुध अधिनियम, 1959 — 2 वर्ष का सश्रम कारावास एवं ₹1,000 अर्थदंड। अर्थदंड अदा नहीं करने पर 6 माह का अतिरिक्त सश्रम कारावास। धारा 27(1) आयुध अधिनियम, 1959 — 7 वर्ष का सश्रम कारावास एवं ₹3,000 अर्थदंड। अर्थदंड अदा नहीं करने पर 1 वर्ष का अतिरिक्त सश्रम कारावास। इस प्रकार न्यायालय द्वारा आरोपी पर कुल ₹9,500 का अर्थदंड भी अधिरोपित किया गया है।
अभियोजन की पैरवी
इस प्रकरण में शासन की ओर से श्री विशाल गुप्ता, प्रभारी पदेन अपर लोक अभियोजक द्वारा अभियोजन का पक्ष न्यायालय के समक्ष रखा गया।

