करैरा में शिक्षा व्यवस्था शर्मसार: सरकारी स्कूल के बच्चों से साफ करवाते हैं लैट्रिन-बाथरूम, विरोध करने पर परिजनों को धमकाते हैं शिक्षक
करैरा, शिवपुरी। मध्यप्रदेश में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए सरकार करोड़ों रुपये खर्च करने का दावा कर रही है, लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों की पोल खोल रही है। करैरा तहसील के ग्राम टपरी पुराना अमोला केशर के शासकीय प्राथमिक विद्यालय में बच्चों से पढ़ाई की जगह बंधुआ मजदूरी जैसा काम कराया जा रहा है। बच्चों से स्कूल की लैट्रिन, बाथरूम साफ करवाई जा रही है और पानी भरने का काम कराया जा रहा है। काम से मना करने पर बच्चों को मारपीट की धमकी दी जाती है।
इस मामले को लेकर आक्रोशित ग्रामीणों ने अनुविभागीय अधिकारी करैरा को लिखित शिकायत देकर दोषी शिक्षकों पर कार्रवाई और उन्हें हटाने की मांग की है। ग्रामीणों ने 19 अगस्त 2026 को सौंपे गए आवेदन में शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
क्या है पूरा मामला?
ग्राम टपरी पुराना अमोला केशर के ग्रामीण हेमंत पाल पुत्र भगवान दास पाल, नरेन्द्र पाल पुत्र धीरन पाल, अपरबल लोधी पुत्र कैलाश लोधी, प्रकाश पाल, अशोक पाल, सुरेन्द्र पाल, धर्मेश पाल, राघवेन्द्र पाल, शिवसिंह पाल, भरत पाल, सोनू पाल, पवन लोधी, उमेश लोधी, धनीराम पाल, वीरबल पाल और धर्मेन्द्र पाल ने संयुक्त शिकायत दी है।
शिकायत के अनुसार उनके बच्चे शा.प्रा.वि. टपरी पुराना अमोला केशर में पढ़ने जाते हैं। विद्यालय में पदस्थ शिक्षक कमलेश आर्य एवं महेन्द्र लोधी बच्चों को पढ़ाने के बजाय स्कूल परिसर में बनी लैट्रिन-बाथरूम की सफाई और पानी भरने जैसे कामों में लगा देते हैं। छोटे-छोटे बच्चों से इस तरह का अमानवीय काम कराया जाता है और यदि कोई बच्चा काम करने से मना करता है तो उसे मारने-पीटने का दबाव बनाया जाता है।
बच्चों ने जब इसकी जानकारी अपने माता-पिता को दी तो परिजन स्कूल पहुंचे और शिक्षकों से इस बारे में बात की। आरोप है कि इस पर शिक्षकों ने सुधरने की बजाय ग्रामीणों के साथ अमर्यादित भाषा में गाली-गलौज की और झूठी एफआईआर दर्ज कराने की धमकी देने लगे। शिक्षकों का कहना है कि "अगर स्कूल में बच्चे काम नहीं करेंगे तो तुम आ जाना काम करने।"
शिक्षा विभाग की लापरवाही उजागर
यह पूरा मामला शिक्षा विभाग की निगरानी व्यवस्था पर बड़ा प्रश्नचिन्ह है। प्राथमिक स्तर पर बच्चों के सर्वांगीण विकास की जिम्मेदारी शिक्षकों पर होती है, लेकिन यहां शिक्षक ही बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ कर रहे हैं। शौचालय सफाई जैसे कार्य कराना न सिर्फ शिक्षा के अधिकार कानून का उल्लंघन है, बल्कि बाल अधिकारों का भी हनन है।
ग्रामीणों का कहना है कि इस तरह के माहौल में उनके बच्चों का भविष्य खराब हो रहा है। बच्चे स्कूल जाने से डरने लगे हैं। कई अभिभावक तो अपने बच्चों को स्कूल भेजना बंद करने पर विचार कर रहे हैं, जिससे ड्रॉपआउट दर बढ़ने का खतरा है।
ग्रामीणों ने एसडीएम से विनम्र निवेदन किया है कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और दोनों शिक्षकों कमलेश आर्य और महेन्द्र लोधी को तत्काल हटाकर उनके स्थान पर अच्छे कार्यकुशल और संवेदनशील शिक्षकों की पदस्थापना की जाए ताकि बच्चों का भविष्य सही से बन सके।
शिकायत की प्रतिलिपि जिला शिक्षा अधिकारी शिवपुरी को भी भेजी गई है। अब देखना यह होगा कि शिक्षा विभाग इस गंभीर शिकायत पर कितनी जल्दी संज्ञान लेता है और दोषियों पर क्या कार्रवाई करता है, या फिर यह शिकायत भी अन्य शिकायतों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगी।

