इंदौर-खंडवा रोड पर तेजी से बदल रही विकास की तस्वीर, जमीन और फार्म हाउस निवेश पर बढ़ी नजर
फोरलेन हाईवे, तीन नई टनल, ओंकारेश्वर का पर्यटन विकास और औद्योगिक गतिविधियां बढ़ा रहीं कॉरिडोर का महत्व
इंदौर। आने वाले वर्षों में इंदौर-खंडवा रोड मध्यप्रदेश के महत्वपूर्ण रोड, धार्मिक पर्यटन और आर्थिक कॉरिडोर में से एक के रूप में उभरता दिखाई दे रहा है। केंद्र और राज्य सरकार की कई बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के कारण तेजाजी नगर, सिमरोल, चोरल, बड़वाह, सनावद, ओंकारेश्वर और खंडवा की ओर कनेक्टिविटी में बड़ा बदलाव हो रहा है। इसी कारण इस बेल्ट में जमीन, फार्म लैंड और फार्म हाउस प्रोजेक्ट को लेकर भी निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ने की संभावना है।
फोरलेन नेशनल हाईवे बदल रहा इंदौर-खंडवा रोड की तस्वीर
केंद्र सरकार के अनुसार NH-347BG के तेजाजी नगर-बालवाड़ा के लगभग 33.4 किलोमीटर हिस्से को फोरलेन किया जा रहा है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि कठिन घाट सेक्शन में भेरूघाट, बाईग्राम और चोरल घाट पर तीन टनल बनाई जा रही हैं। सरकार का कहना है कि इससे इंदौर से ओंकारेश्वर और खंडवा की यात्रा अधिक सुरक्षित और तेज होगी तथा माल परिवहन को भी फायदा मिलेगा। मई 2026 की सरकारी जानकारी में इस प्रोजेक्ट को इसी वर्ष पूरा करने की दिशा में बताया गया था।
इसका महत्व केवल इंदौर-खंडवा तक सीमित नहीं है। यह कॉरिडोर आगे बुरहानपुर और महाराष्ट्र की ओर संपर्क बेहतर करने के साथ ओंकारेश्वर जैसे बड़े धार्मिक केंद्र तक पहुंच को भी आसान करता है। सिंहस्थ 2028 के दौरान महाकालेश्वर और ओंकारेश्वर के बीच बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की आवाजाही को देखते हुए भी इस मार्ग की उपयोगिता बढ़ने वाली है।
खंडवा से आगे भी हजारों करोड़ का हाईवे नेटवर्क
केंद्र सरकार ने 2026 में NH-347B के 233.653 किलोमीटर के विभिन्न हिस्सों के उन्नयन के लिए ₹4,415.60 करोड़ की परियोजना को मंजूरी दी है। सरकारी जानकारी के अनुसार यह कॉरिडोर रेलवे स्टेशन, औद्योगिक क्षेत्र, फूड पार्क और अन्य आर्थिक-लॉजिस्टिक नोड्स को बेहतर कनेक्टिविटी देगा।
इसके अतिरिक्त खंडवा-छैगांव माखन NH-347B को फोरलेन करने के लिए भी 2026 में केंद्र सरकार की ई-प्रोक्योरमेंट प्रणाली पर टेंडर प्रक्रिया दर्ज हुई है।
ओंकारेश्वर में धार्मिक पर्यटन के साथ बड़े विकास कार्य
इंदौर-खंडवा रोड की सबसे बड़ी ताकतों में ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग है। यहां धार्मिक पर्यटन के साथ बड़े स्तर पर इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित हो रहा है।
ओंकारेश्वर में एकात्म धाम परियोजना के तहत आदि शंकराचार्य की 108 फीट ऊंची प्रतिमा स्थापित हो चुकी है और आगे अद्वैत लोक संग्रहालय, अंतरराष्ट्रीय अद्वैत वेदांत संस्थान सहित विभिन्न सुविधाओं की परिकल्पना की गई है। मध्यप्रदेश पर्यटन की आधिकारिक सामग्री में इन परियोजनाओं को ओंकारेश्वर के बड़े सांस्कृतिक-आध्यात्मिक विकास के हिस्से के रूप में प्रस्तुत किया गया है।
इसी कड़ी में जून 2026 में ओंकारेश्वर मंदिर परिसर में होल्डिंग हॉल, विजिटर सुविधाओं और अन्य विकास कार्यों के लिए करीब ₹37.33 करोड़ का सरकारी टेंडर भी जारी किया गया।
ओंकारेश्वर में 600 MW फ्लोटिंग सोलर प्रोजेक्ट की योजना
ऊर्जा क्षेत्र में भी यह इलाका महत्वपूर्ण है। रीवा अल्ट्रा मेगा सोलर लिमिटेड की आधिकारिक परियोजना सूची में ओंकारेश्वर बांध में 600 मेगावाट फ्लोटिंग सोलर पार्क की योजना दर्ज है। परियोजना के लिए तकनीकी और वित्तीय सहायता में विश्व बैंक की भूमिका भी बताई गई है।
खंडवा में औद्योगिक गतिविधियों के लिए भी सरकारी जमीन
Invest MP के मौजूदा लैंड बैंक में खंडवा के रूधी-भावसिंगपुरा औद्योगिक क्षेत्र की करीब 200 हेक्टेयर भूमि दर्ज है। यह दर्शाता है कि खंडवा क्षेत्र केवल धार्मिक और कृषि गतिविधियों तक सीमित नहीं, बल्कि औद्योगिक विकास के सरकारी ढांचे में भी शामिल है।
क्यों बढ़ सकता है फार्म हाउस और फार्म लैंड का आकर्षण?
इंदौर जैसे बड़े शहर के नजदीक प्राकृतिक वातावरण, सिमरोल-चोरल की हरियाली, ओंकारेश्वर का धार्मिक पर्यटन और बेहतर होती सड़क कनेक्टिविटी—ये सभी कारण इस बेल्ट को सेकंड होम, वीकेंड होम, फार्म हाउस, रिसॉर्ट और पर्यटन आधारित प्रॉपर्टी के लिए आकर्षक बना सकते हैं।
विशेष रूप से तेजाजी नगर–सिमरोल–चोरल–बड़वाह–ओंकारेश्वर बेल्ट में हाईवे कनेक्टिविटी बेहतर होने से भविष्य में यात्रा समय और पहुंच की सुविधा में सुधार संभावित है। इसका लाभ होटल, रिसॉर्ट, रेस्टोरेंट, फार्म स्टे और फार्म हाउस जैसी गतिविधियों को मिल सकता है।
हालांकि प्रॉपर्टी खरीदते समय केवल भविष्य में कीमत बढ़ने की उम्मीद पर फैसला करना उचित नहीं है। निवेश से पहले टाइटल, डायवर्जन, मास्टर प्लान/लैंड यूज, पहुंच मार्ग, रजिस्ट्री, सीमांकन, बिजली-पानी तथा संबंधित सरकारी अनुमतियों की जांच जरूरी है। जमीन या फार्म हाउस की कीमत बढ़ने की कोई गारंटी नहीं होती।
आने वाले वर्षों में महत्वपूर्ण हो सकता है इंदौर-ओंकारेश्वर-खंडवा कॉरिडोर
एक ओर फोरलेन नेशनल हाईवे और टनल, दूसरी ओर ओंकारेश्वर का धार्मिक-पर्यटन विकास, ऊर्जा परियोजनाएं और खंडवा क्षेत्र में औद्योगिक आधार—इन सभी को एक साथ देखें तो इंदौर-खंडवा रोड केवल एक आवागमन मार्ग नहीं, बल्कि पर्यटन, कृषि, ऊर्जा, उद्योग और रियल एस्टेट गतिविधियों से जुड़ता हुआ कॉरिडोर बन रहा है।
यही वजह है कि लंबी अवधि के नजरिए से इस क्षेत्र की जमीन और फार्म हाउस परियोजनाओं पर निवेशकों की नजर बनी हुई है।

