“गृहस्थ जीवन में आत्मसाक्षात्कार का सरल मार्ग — सहजयोग”
योग का वास्तविक अर्थ है — जुड़ना, मिलना और पूर्णता की ओर अग्रसर होना। मानव जीवन सदैव किसी ऐसी शक्ति की खोज में रहता है, जो उसे आंतरिक शांति, संतुलन और आत्मिक आनंद प्रदान कर सके। विज्ञान भी यह सिद्ध करता है कि प्रकृति का प्रत्येक कण अपने अस्तित्व को पूर्ण करने के लिए दूसरे तत्वों से जुड़ने का प्रयास करता है। उसी प्रकार मनुष्य भी आत्मा और परमात्मा के मिलन की सहज अनुभूति चाहता है।
युगों से आत्मज्ञान और आत्मसाक्षात्कार के अनेक मार्ग बताए गए हैं। अधिकांश मार्ग संसार से दूर होकर वैराग्य अपनाने की प्रेरणा देते हैं, किंतु भारतीय संस्कृति की विशेषता यह है कि वह गृहस्थ जीवन में रहते हुए भी आध्यात्मिक उत्कर्ष का मार्ग दिखाती है। परिवार, समाज और अपने दायित्वों का संतुलित एवं विवेकपूर्ण पालन करते हुए आत्मिक उन्नति करना ही वास्तविक सहजयोग है।
पूज्य श्री माताजी निर्मला देवी जी द्वारा प्रदत्त सहजयोग आत्मोन्नति की एक अत्यंत सरल, सर्वसुलभ एवं नि:शुल्क साधना पद्धति है। सहजयोग में साधना की शुरुआत वहीं से होती है, जहां तक पहुंचने के लिए साधकों को वर्षों के कठिन तप और साधना से गुजरना पड़ता है। श्री माताजी की कृपा से साधक क्षणमात्र में आत्मसाक्षात्कार प्राप्त कर परम चैतन्य से जुड़ने का अनुभव कर सकता है।
सहजयोग की विशेषता यह है कि इसमें संसार, परिवार या सामाजिक उत्तरदायित्वों का त्याग नहीं करना पड़ता। न ही किसी प्रकार का आर्थिक शुल्क देना होता है। केवल विनम्रता, श्रद्धा और पूर्ण समर्पण ही इसकी आधारशिला हैं। यह साधना व्यक्ति को अहंकार, क्रोध, लोभ, मोह, ईर्ष्या तथा दुर्व्यसनों से मुक्त कर प्रेम, आनंद और संतोष से परिपूर्ण जीवन जीने की प्रेरणा देती है।
सहजयोग के नियमित अभ्यास से मानसिक तनाव कम होता है, विचारों में शांति आती है तथा व्यक्ति निर्विचार ध्यान की अवस्था का अनुभव करता है। यही अवस्था आंतरिक संतुलन और आत्मिक जागृति का द्वार खोलती है।
सहजयोग से संबंधित अधिक जानकारी एवं नि:शुल्क ध्यान सत्रों हेतु संपर्क करें — टोल फ्री नंबर: 1800 2700 800

