पांच राज्यों का फैसला: बंगाल में ढहा ममता का दुर्ग, केरल से वामपंथ की विदाई और तमिलनाडु में सत्ता परिवर्तन
नई दिल्ली, देश के चार राज्यों पश्चिम बंगाल, असम, तमिलनाडु, केरल और केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में हुए विधानसभा चुनाव के नतीजे सोमवार को घोषित हो गए. इस बार के परिणामों में जहां कुछ राज्यों में सत्ता परिवर्तन हुआ, वहीं कुछ जगहों पर सत्ताधारी दलों ने अपना जनाधार मजबूत किया. पश्चिम बंगाल में सबसे बड़ा सियासी उलटफेर देखने को मिला, जहां भाजपा ने मजबूत प्रदर्शन करते हुए 15 वर्षों से सत्ता में स्थापित तृणमूल कांग्रेस को पटखनी दी.
बंगाल विधानसभा के लिए हुए चुनाव में बीजेपी ने 294 सदस्यीय 200 से अधिक सीटें जीतकर प्रचंड बहुमत से जीत दर्ज की. वहीं, ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस 81 सीटों पर सिमट गई. यहां तक कि ममता अपनी भवानीपुर सीट भी हार गई हैं. वहीं बीजेपी के शुभेंदु अधिकारी ने नंदीग्राम और भवानीपुर दोनों सीटों पर कमल खिलाया है.
असम में भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए ने जीत की हैट्रिक बनाई. यह जीत राज्य में पार्टी की पकड़ और उसके शासन में जनता के भरोसे को दर्शाती है. खासकर चाय बागान क्षेत्रों और ग्रामीण इलाकों में मिला समर्थन इस जीत का अहम आधार बना. असम में कांग्रेस का सबसे बड़ा चेहरा और सांसद गौरव गोगोई भी जोरहाट से चुनाव हार गए हैं.
तमिलनाडु में इस बार बड़ा राजनीतिक बदलाव देखने को मिला, जहां अभिनेता से नेता बने विजय के नेतृत्व वाली टीवीके सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी. टीवीके ने अपने पहले ही चुनाव में 100 से अधिक सीटें जीतकर एमके स्टालिन की पार्टी डीएमके को राज्य की सत्ता से उखाड़ फेंकने में अहम भूमिका निभाई. डीएमके 60 सीटों पर सिमट गई. एआईडीएमके को 47 सीटों पर जीत मिली. डीएमके चीफ और राज्य के सीएम स्टालिन तक अपनी सीट नहीं बचा पाए और उन्हें पार्टी के ही बागी वीएस बाबू ने चुनावी शिकस्त दी है.
केरल में कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट ने वाम मोर्चे को 10 साल बाद सत्ता से बाहर कर दिया. एंटी-इंकंबेंसी, रोजगार और महंगाई जैसे मुद्दों पर जनता की नाराजगी ने केरल में लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट को सत्ता से बाहर का रास्ता दिखाया. यूडीएफ को 99 सीटें मिलीं, जबकि वाम मोर्चा 35 सीटों पर सिमट गया. केरल में बीजेपी ने भी जीत का खाता खोला और तिरुवनंतपुरम की तीनों सीटें अपनी झोली में डालने में कामयाब रही. इस नतीजे से देशभर में लेफ्ट का एकमात्र किला भी अब ढह गया है.
पुडुचेरी में एनडीए ने सत्ता बरकरार रखते हुए अपने कामकाज पर जनता की मुहर हासिल की. एनडीए के 'बेस्ट पुडुचेरी' के विजन और पिछले कार्यकाल की उसकी योजनाओं को मतदाताओं ने फिर से अपना समर्थन दिया, जिससे गठबंधन की स्थिति और मजबूत हुई. पीएम मोदी ने बीजेपी की जीत के बाद पार्टी मुख्यालय में कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए रिकॉर्ड मतदान और महिलाओं की बढ़ती भागीदारी को इन चुनावों की खासियत बताया. उन्होंने निष्पक्ष और शांतिपूर्ण मतदान सुनिश्चित करने में चुनाव आयोग और सुरक्षा बलों की भूमिका को अहम बताते हुए उनकी तारीफ की.
साभार आज तक

