अपना हक पाने के लिए ग्रामीणों को करना पड़ रही हैं कड़ी मशक्कत
ग्रामीणों ने किया भैंस के आगे बीन बजाओ आंदोलन
महेन्द्र मालवीय रणजीत टाईम्स
बुरहानपुर जिले के खकनार तहसील के अंतर्गत आने पांगरी बांध परियोजना पर सरकार की चुप्पी के खिलाफ किसानों का अनोखा और तीखा प्रतिरोध
पांगरी बांध परियोजना को लेकर किसानों का आक्रोश थमने का नाम नहीं ले रहा है। 4 जनवरी को बड़ी संख्या में किसान उतावली नदी के तट पर एकत्र हुए और प्रशासन की अनदेखी के विरोध में भैंसों के आगे बीन बजाकर उस मुहावरे को सजीव कर दिया— भैंस खड़ी पगुराय। इससे पहले 31 दिसंबर को किसानों ने अनुविभागीय कार्यालय, नेपाल नगर में हल्ला बोल आंदोलन किया था, लेकिन कोई सकारात्मक जवाब न मिलने पर यह अनोखा प्रदर्शन किया गया।
आंदोलन का नेतृत्व कर रहे डॉ. रवि कुमार पटेल ने कहा कि भूमि अधिग्रहण कानून 2013 के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में दोगुना मुआवजा किसानों का अधिकार है। उन्होंने आरोप लगाया कि परियोजना में किसानों, आदिवासियों, दलितों और पिछड़े वर्गों का शोषण हो रहा है। आंदोलन में बड़ी संख्या में किसान व आदिवासी शामिल हुए और शांतिपूर्ण ढंग से न्याय की मांग दोहराई। अब सोचने वाली बात यह है कि अपनी मांगों को पूरा करवाने के लिए भी ग्रामीणों को इस प्रकार के आन्दोलन करना होगा आखिर कब होगी ग्रामीणों की मांग पूरी क्या मोहन सरकार तक ग्रामीणों की आवाज पहुंची क्योंकि ग्रामीण अपने हक के लिए लम्बे समय से आस लगाए अधिकारियों के दफ्तरों के चक्कर लगा रहे हैं लेकिन जिला प्रशासन , की ओर से इन्हें कोई उचित प्रतिक्रिया नहीं मिल रही है और ना ही जन प्रतिनिधि कोई पहल कर रहे है जिसके कारण ग्रामीण अपने स्तर पर अलग अलग कोशिशें करना पड़ रहा है अब देखना यह है कि आखिर कब तक ग्रामीणों को अपने हक के लिए मशक्कत करना पड़ेगा, क्या ग्रामीण की सुनवाई होगी या सरकार के आगे ग्रामीणों को ही घुटने टेकना होगा।

