आवारा पशुओं के बढ़ते संकट पर उठी आवाज, हर घर दो गाय पालने की योजना बनाने की अपील

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गौशालाओं के नियमित निरीक्षण की मांग—पारस कुमार जैन बोले, योजनाओं के साथ पशुपालन को भी मिले प्रोत्साहन
रिपोर्टर महेंद्र मिश्रा
करैरा। सरकार द्वारा जनकल्याण के लिए संचालित विभिन्न योजनाओं की सराहना करते हुए वार्ड क्रमांक 9, ब्लॉक ऑफिस के पीछे निवासी पारस कुमार जैन ने आवारा पशुओं की बढ़ती समस्या के समाधान के लिए एक नई पहल की मांग उठाई है। उन्होंने केंद्र एवं राज्य सरकार से अपील की है कि जिस प्रकार किसानों, महिलाओं और जरूरतमंद परिवारों के लिए विभिन्न योजनाएं संचालित की जा रही हैं, उसी तरह प्रत्येक परिवार में कम से कम दो गाय पालने को प्रोत्साहित करने वाली विशेष योजना बनाई जाए।
पारस कुमार जैन का कहना है कि शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में सड़कों पर बड़ी संख्या में आवारा गाय एवं अन्य पशु दिखाई देते हैं। ये पशु अक्सर सड़क किनारे अथवा मुख्य मार्गों पर बैठे रहते हैं, जिससे वाहन दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है और आम नागरिकों के जान-माल की सुरक्षा भी प्रभावित होती है। उनका मानना है कि यदि परिवारों को गाय पालने के लिए प्रोत्साहित किया जाए तो एक ओर पशुओं को आश्रय मिलेगा, वहीं दूसरी ओर सड़कों पर घूमने वाले आवारा पशुओं की संख्या में भी कमी लाई जा सकती है।
उन्होंने कहा कि गौसेवा केवल व्यवस्था का विषय नहीं, बल्कि समाज की संवेदनशीलता और जिम्मेदारी का भी परिचायक है। सरकार द्वारा शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में गौशालाएं संचालित की जा रही हैं, लेकिन इन गौशालाओं की वास्तविक स्थिति की समय-समय पर जांच होना आवश्यक है। उन्होंने आरोप लगाया कि कई स्थानों पर गौशालाओं के संचालन का लाभ तो लिया जा रहा है, लेकिन वहां पर्याप्त संख्या में गायें दिखाई नहीं देतीं, जिसके कारण बेजुबान पशु सड़कों पर भटकने को विवश हैं।
जैन ने शासन-प्रशासन से मांग की कि गौशालाओं का नियमित एवं आकस्मिक निरीक्षण कराया जाए, वहां उपलब्ध पशुओं की संख्या, चारे-पानी और व्यवस्थाओं की वास्तविक स्थिति की निगरानी की जाए तथा लापरवाही मिलने पर जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध उचित कार्रवाई की जाए।
उन्होंने कहा कि सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं के साथ यदि पशुपालन को भी सामाजिक जिम्मेदारी से जोड़ा जाए तो इससे गौवंश को संरक्षण, परिवारों को पशुपालन से लाभ और सड़कों को आवारा पशुओं से राहत मिल सकती है।
पारस कुमार जैन ने अंत में सरकार से पुनः आग्रह किया कि ‘हर घर दो गाय’ जैसी प्रोत्साहन आधारित योजना पर गंभीरता से विचार किया जाए, ताकि बेजुबान पशुओं को सुरक्षित आश्रय मिल सके और आमजन भी सड़क पर आवारा पशुओं से उत्पन्न दुर्घटनाओं के खतरे से सुरक्षित रह सके।

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