जब स्कूल नहीं पहुंचीं बेटियां, तो शिक्षक पहुंच गए जंगल की पगडंडी तक

  • Share on :

फीस और ड्रेस बनी पढ़ाई की राह में बाधा, प्राचार्य ने कहा—“तुम बस स्कूल आओ, बाकी हम देख लेंगे”
नैगवा के शिक्षकों की संवेदनशील पहल से फिर शिक्षा की राह पर लौटेंगी अंकिता और सरिता
कटनी से जिला ब्यूरो नवल किशोर 
कटनी । सुबह स्कूल की घंटी बजी। बच्चे कक्षाओं में पहुंचे, किताबें खुलीं और पढ़ाई शुरू हुई। लेकिन कक्षा 10वीं की दो बेटियों—अंकिता और सरिता की कुर्सियां खाली थीं। यह खाली कुर्सियां नैगवा के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के शिक्षकों को खटकने लगीं। सवाल सिर्फ इतना नहीं था कि दोनों छात्राएं स्कूल क्यों नहीं आ रही हैं, सवाल यह था कि कहीं कोई मजबूरी तो उन्हें शिक्षा से दूर नहीं कर रही?
 शिक्षकों ने बच्चों को ढूंढने के लिए करीब तीन किलोमीटर की राह पकड़ ली

प्राचार्य विपिन तिवारी, अतिथि शिक्षक और स्टाफ के साथ खुसरा महादेव पहुंच गए। वहां दोनों छात्राएं मिलीं। बातचीत हुई तो पता चला कि स्कूल से दूरी उनकी पसंद नहीं, बल्कि परिस्थितियों की मजबूरी थी।
एक के पास फीस नहीं, दूसरी के पास ड्रेस नहीं
सरिता ने अपनी परेशानी बताते हुए कहा कि उसके पास स्कूल की फीस भरने के पैसे नहीं हैं। आर्थिक तंगी के कारण वह स्कूल आने से बच रही थी।
प्राचार्य ने उसे भरोसा दिया—
“तुम बस स्कूल आओ, फीस की चिंता मत करो। तुम्हारी समस्या दूर करने की व्यवस्था हम करेंगे।” इन शब्दों में सिर्फ आश्वासन नहीं था, बल्कि उस बच्ची के लिए यह भरोसा था कि उसकी पढ़ाई उसकी आर्थिक स्थिति से बड़ी है। सरिता ने हामी भर दी।
 प्राचार्य ने उससे कहा—
  “ड्रेस की चिंता मत करो। तुम विद्यालय आओ, ड्रेस की व्यवस्था विद्यालय की ओर से की जाएगी।” अंकिता के चेहरे पर भी भरोसा लौटा और उसने स्कूल आने की सहमति दे दी।

नैगवा विद्यालय के प्राचार्य विपिन तिवारी कहते हैं कि किसी बच्चे की पढ़ाई केवल फीस या ड्रेस जैसी जरूरत के कारण रुकनी नहीं चाहिए। विद्यालय का प्रयास है कि हर बच्चा स्कूल आए, पढ़े और अपने भविष्य को बेहतर बनाने की दिशा में आगे बढ़े।

Latest News

Everyday news at your fingertips Try Ranjeet Times E-Paper