अखिर कब मिलेगा ? मृतक बेटी मुस्कान और उनके परिवार को न्याय

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एक साल से दर - दर भटक रहा परिवार, क्या बीजेपी सरकार मे बेटी को मिल सकेगा न्याय ?
ब्यूरो चीफ ग्वालियर दिव्यानंद अर्गल 
ग्वालियर।  मुस्कान आर्य की मौत के मामले में मृतका के परिजनों को न्याय का इंतजार है, लेकिन तत्कालीन जांच अधिकारी और सीएसपी नागेंद्र सिकरवार के अदालत में पेशी पर ना पहुंचने से मामला आगे नहीं बढ़ पा रहा है। दरअसल मुस्कान की मौत के मामले जांच अधिकारी रहे सीएसपी नागेंद्र सिंह ने जांच में लीपापोती कर पूरा केस मृतका के ससुराल पक्ष के फेवर में करने की कोशिश की। उन पर केस को कमजोर करने के लिए मुस्कान के ससुराल वालों से घूस के तौर पर मोटी रकम लेने का भी आरोप है।  फरियादी पक्ष की तरफ से इस मामले में जब जांच अधिकारी की जांच पर सवाल उठाए और जांच अधिकारी पर मामले की लीपापोती करने के आरोप लगाए और तत्कालीन पुलिस अधीक्षक राजेश चंदेल आईजी ग्वालियर अरविंद सक्सेना को ज्ञापन देकर इस मामले में निष्पक्ष जांच की मांग की थी। परिजनों की इस मांग पर आईजी के निर्देश पर एसपी ने सीएस पी नागेंद्र सिंह की जगह डीएसपी संतोष पटेल को जांच का जिम्मा सौंपा। की जाँच में पूर्व अनुविभागीय अधिकारी सीएसपी नागेन्द्र सिकरवार की लापरवाही एवं गवाह पेशी से लगातार अनुपस्थिति के कारण न्याय में हो रही देरी | मृतका मुस्कान आर्या प्रकरण में प्रारंभिक जाँच अधिकारी के रूप में सीएसपी नागेन्द्र सिकरवार पदस्थ थे।  तत्कालीन डीएसपी सन्तोष पटेल द्वारा जाँच को दोबारा शुरू से किए जाने पर यह स्पष्ट हुआ कि मामला हत्या का है। उन्होंने साक्ष्यों के आधार पर हत्या का मुक़दमा दर्ज किया ,  नागेन्द्र सिकरवार पूर्व में नहीं जोड़ रहे थे। मामला न्यायालय में विचाराधीन है। परंतु पिछले 5 महीनों से अधिक समय से न्यायालय द्वारा दी गई बार-बार दी गई तारीखों के बावजूद गवाह के रूप में बुलाए जाने पर भी ष्टस्कनागेन्द्र सिकरवार हर तारीख को कोई न कोई बहाना बनाकर उपस्थित नहीं हो रहे हैं। यह स्पष्ट है कि गवाह नागेन्द्र सिकरवार की अनुपस्थिति के कारण बार-बार गिरफ्तारी वारंट/बॉन्ड की कार्यवाही दर्ज की गई है। नागेंद्र सिंह की लगातार अनुपस्थिति के कारण जहां न्याय प्रक्रिया में अत्यधिक विलंब हो रहा है, वहीं फरियादी परिवार को मानसिक तनाव एवं पीड़ा का सामना करना पड़ रहा है।  खबर यह भी है कि पूर्व जांचकर्ता अधिकारी नागेंद्र सिंह इस मामले में सुप्रीम कोर्ट से अंतिम जमानत हासिल करने के प्रयास कर रहे हैं। इस पूरे मामले से जुड़े सूत्रों का कहना - है कि मध्य प्रदेश सरकार के एक कैबिनेट मंत्री का भी इस मामले में पुलिस पर दबाव है। क्योंकि आरोपी परिवार की कैबिनेट मंत्री से नजदीको बताई जा रही है।

घटना का विवरण संक्षेप में 
मृतका मुस्कान आर्य के परिजनों का कहना है कि उसका विवाह 5 मई को चंदन आर्य के साथ हिंदू रीति रिवाज के अनुसार हुआ था। विवाह के दो-तीन महीने बाद ही मुस्कान के पति चंदन आर्य, ससुर बालचंद आर्य, सास आशा आर्य, जीजा मनोज आर्य तथा मामा ससुर प्रेम नारायण आर्य ने उसे दहेज के लिए प्रताड़ित करना शुरू कर दिया। तमाम समझाइश के बाद भी उसके ससुरालीजन नहीं माने और उसे शारीरिक एवं मानसिक रूप से प्रताड़ित करने लगे। इसी बीच 24 नवंबर को उन्हें चंदन ने फोन कर बताया कि मुस्कान की तबीयत खराब है। सूचना मिलते ही जब वह उसकी ससुराल पहुंचे पहुंचे तो देखा कि मुस्कान के पूरे शरीर पर चोटों के निशान थे एवं सिर से खून बह रहा था। मायके पक्ष के लोग उसे तत्काल अस्पताल लेकर पहुंचे जहां 26 नवंबर 2024 को इलाज के दौरान उसने दम तोड़ दिया। 

परिजनों ने सीबीआई जांच की भी की थी मांग
मृतका के परिजनों का कहना है कि पुलिस की उदासीनता की वजह से ही सीबीआई जांच की भी की  और वरिष्ठ अधिकारियों से मांग कर रहे हैं कि केस से जुड़े हुए सभी पहलुओं को ध्यान मे रखकर लगातार सीबीआई जांच की मांग भी परिजन कर रहे हैं।

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