श्रवण एवं वाणी बाधित प्रोफेशनल्स तथा साइन लैंग्वेज इंटरप्रेटर्स के लिए 40 घंटे का मध्यस्थता प्रशिक्षण कार्यक्रम समावेशी न्याय को सुदृढ़ करेगा - मुख्य न्यायाधिपति श्री संजीव सचदेवा

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इंदौर। समावेशी न्याय तक समान पहुंच सुनिश्चित करने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल करते हुए मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा देश का प्रथम श्रवण एवं वाणी बाधित प्रोफेशनल्स तथा साइन लैंग्वेज इंटरप्रेटर्स के लिए 40 घंटे का 5 दिवसीय मध्यस्थता प्रशिक्षण कार्यक्रम 14 से 18 मार्च 2026 तक इंदौर में सफलतापूर्वक आयोजित किया गया।

            इस कार्यक्रम का समापन सत्र 18 मार्च गुरुवार को मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के समिति कक्ष क्रमांक-1 में मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधिपति एवं मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के मुख्य संरक्षक श्री न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा, मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के  प्रशासनिक न्यायाधिपति एवं मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के कार्यपालक अध्यक्ष श्री न्यायमूर्ति विवेक रूसिया तथा अन्य न्यायमूर्तिगण की गरिमामयी उपस्थिति में संपन्न हुआ। इंदौर एवं ग्वालियर खंडपीठ के न्यायमूर्तिगण वर्चुअल माध्यम से कार्यक्रम में सम्मिलित हुए।

            यह कार्यक्रम पांच दिवसीय प्रशिक्षण की प्रमुख झलकियों का वीडियो प्रस्तुतीकरण दर्शाया जाकर प्रारंभ किया गया। प्रतिभागियों ने अपने अनुभव साझा करते हुए इस पहल के सकारात्मक एवं परिवर्तनकारी प्रभाव को रेखांकित किया। तत्पश्चात, मध्यस्थता एवं सुलह परियोजना समिति, उच्चतम न्यायालय, नई दिल्ली की वरिष्ठ प्रशिक्षक सुश्री अनुजा सक्सेना एवं सुश्री रीमा भंडारी ने भी अपने विचार व्यक्त किए तथा अनुभव साझा किये।

            अपने समापन उ‌द्बोधन में मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधिपति एवं मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के मुख्य संरक्षक श्री न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा ने कहा कि न्याय का वास्तविक स्वरूप तभी साकार होता है जब वह प्रत्येक व्यक्ति तक सुलभ हो। उन्होंने यह भी व्यक्त किया कि संवाद में आने वाली बाधाएं न्याय तक पहुंच में अवरोध उत्पन्न करती है और इस प्रकार के नवाचार इन बाधाओं को दूर करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।

             मुख्य न्यायाधिपति श्री न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा द्वारा यह भी कहा कि मध्यस्थता केवल मौखिक संवाद तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समझ, संवेदनशीलता और विश्वास पर आधारित प्रक्रिया है। उन्होंने प्रतिभागियों के दृढ़ संकल्प की सराहना करते हुए कहा कि जब इच्छाशक्ति मजबूत हो, तब कोई भी बाधा प्रगति में अवरोध नहीं बन सकती। उन्होंने आगे कहा कि यह कार्यक्रम केवल एक प्रशिक्षण का समापन नहीं, बल्कि विवाद समाधान की एक नई, समावेशी सोच की शुरुआत है, जो आपसी सौहार्द और मानवीय संबंधों को सुदृढ़ करती है।

            इस अवसर पर मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के  प्रशासनिक न्यायाधिपति एवं मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के कार्यपालक अध्यक्ष श्री न्यायमूर्ति विवेक रूसिया ने अपने उद्बोधन में कहा कि मध्यस्थता केवल विवाद निराकरण का साधन नहीं, बल्कि समझ, सहानुभूति और पारस्परिक विश्वास पर आधारित एक प्रक्रिया है। उन्होंने इस पहल को एक अग्रणी प्रयास बताते हुए कहा कि यह श्रवण एवं वाणी बाधित व्यक्तियों को मुख्यधारा की मध्यस्थता प्रक्रिया में सम्मिलित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, जिससे न्याय वितरण प्रणाली अधिक समावेशी एवं सहभागितापूर्ण बनेगी।

            उक्त प्रशिक्षण कार्यक्रम में मध्यस्थता के प्रमुख आयामों जैसे संप्रेषण एवं वार्ता कौशल, नैतिकता तथा रोल प्ले अभ्यासों को शामिल किया गया, साथ ही सांकेतिक भाषा एवं दृश्य संप्रेषण माध्यमों के उपयोग द्वारा तकनीकों के अनुकूलन पर विशेष बल दिया गया।

            यह पहल समावेशी मध्यस्थता प्रथाओं को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है तथा समाज के सभी वर्गों, विशेषकर दिव्यांगजनों के लिए न्याय को सुलभ, समान एवं सहभागितापूर्ण बनाने हेतु मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की प्रतिबद्धता को पुनः स्थापित करती है।

            इस गरिमामय अवसर पर मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल एवं रजिस्ट्री के अधिकारीगण श्री धरमिन्दर सिंह, मध्यप्रदेश राज्य न्यायिक अकादमी के निदेशक श्री उमेश पांडव एवं अकादमी के अधिकारीगणसहितमध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की सदस्य सचिव सुश्री सुमन श्रीवास्तव, , , मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के अतिरिक्त सचिव श्री अरविन्द श्रीवास्तव एवं मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के उप सचिव श्री अनिरुद्ध जैन उपस्थित रहे।

            कार्यक्रम का समापन मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की सदस्य सचिव सुश्री सुमन श्रीवास्तव द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ किया गया।

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