एक बेहतर पहल… जब खबरों से परे मिला पत्रकारिता परिवार
शरद पूर्णिमा की चांदनी में आत्मीय मिलन, भजन-गरबा और संवाद की यादगार शाम
दीपक कर्दम की पहल, गौरव रणदिवे की सहजता और विधायक गोलू शुक्ला का सहयोग रहा खास
राजेश धाकड़ | इंदौर।
खबरों की भागदौड़, समय की पाबंदी और जिम्मेदारियों के बीच पत्रकारों की जिंदगी अक्सर काम तक सिमटकर रह जाती है। दिनभर दूसरों की खबरों को तलाशने, घटनाओं को समझने और समाज की आवाज बनने वाले पत्रकारों को भी कभी ऐसा अवसर चाहिए, जहां वे पेशेगत जिम्मेदारियों से इतर अपनों के बीच बैठ सकें, खुलकर बातचीत कर सकें और जिंदगी के कुछ खुशनुमा पल साझा कर सकें। इंदौर प्रेस क्लब में शरद पूर्णिमा के अवसर पर आयोजित मिलन समारोह कुछ ऐसी ही खूबसूरत पहल बनकर सामने आया।
प्रेस क्लब अध्यक्ष दीपक कर्दम की इस पहल ने पत्रकारिता परिवार को खबरों की दुनिया से कुछ समय के लिए बाहर निकलकर आपसी आत्मीयता, संवाद और सांस्कृतिक रंगों के बीच समय बिताने का अवसर दिया। चांदनी रात, संगीत की मधुर धुनें, भजनों की भक्तिमय प्रस्तुति, गरबा और साथियों के बीच हंसी-मजाक ने इस शाम को यादगार बना दिया।
आखिर, जो दूसरों की कहानियां लिखते हैं, उनके अपने रिश्तों के भी कुछ खूबसूरत किस्से होने चाहिए।
सहज संवाद में उठा पत्रकारों के स्वास्थ्य और सुरक्षा का मुद्दा
कार्यक्रम में भाजपा के प्रदेश महामंत्री गौरव रणदिवे निर्धारित समय के आसपास ही पहुंच गए। उनकी सहज उपस्थिति और पत्रकारों के साथ अनौपचारिक संवाद ने आयोजन को आत्मीयता प्रदान की। बातचीत के दौरान पत्रकारों के स्वास्थ्य और सुरक्षा से जुड़े विषय पर भी चर्चा हुई। इसी क्रम में दीपक कर्दम की ओर से पत्रकारों के लिए पांच लाख रुपये तक के निःशुल्क स्वास्थ्य बीमा की व्यवस्था का उल्लेख सामने आया।
पत्रकारिता के क्षेत्र में काम करने वाले लोगों के लिए स्वास्थ्य सुरक्षा एक महत्वपूर्ण विषय है। दिन-रात की भागदौड़, अनियमित दिनचर्या और जोखिमों के बीच काम करने वाले पत्रकारों के कल्याण से जुड़ी ऐसी चर्चाएं इस बात की याद दिलाती हैं कि पत्रकारिता परिवार के हितों पर भी गंभीरता से ध्यान देने की जरूरत है।
वहीं, विधायक गोलू शुक्ला का सहयोग भाव भी आयोजन की खास बात रहा। ऐसे आयोजनों में सहयोग का महत्व केवल व्यवस्थाओं तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह आपसी विश्वास, सम्मान और अपनत्व को भी मजबूत करता है।
भजनों की मिठास, संगीत की धुन और गरबा का नया प्रयोग
शरद पूर्णिमा की शाम को सांस्कृतिक रंगों से सजाने में कलाकारों की प्रस्तुतियों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। गायक कपिल पुरोहित के भजनों ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया। वहीं, गोपाल बैंड और सेक्सोफोन वादक विनय गोरेले की प्रस्तुतियों ने संगीत की मधुरता से समां बांध दिया।
शरद पूर्णिमा के अवसर पर गरबा आयोजन एक नया प्रयोग रहा। पारंपरिक उत्सव में इस सांस्कृतिक प्रस्तुति ने अलग रंग भर दिया। संगीत की धुनों के बीच साथियों का उत्साह और सहभागिता आयोजन को औपचारिक कार्यक्रम से आगे ले जाकर पारिवारिक मिलन का स्वरूप देती नजर आई।
महामंडलेश्वर नितिन मतकर सहित पत्रकारिता, सामाजिक और राजनीतिक क्षेत्र से जुड़े अनेक गणमान्यजन इस अवसर पर उपस्थित रहे।
हंसी-मजाक के बीच रिश्तों की गर्माहट
किसी भी परिवार की असली खूबसूरती उसकी सहजता में होती है, जहां बातचीत के बीच हंसी के पल अपने आप जन्म लेते हैं। प्रेस क्लब के इस आयोजन में भी कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला। प्रमोद दीक्षित और जीतेन्द्र जाखेटिया की मस्ती ने माहौल को और खुशनुमा बना दिया।
बातचीत और हंसी-मजाक के बीच प्रमोद दीक्षित की ओर से महामंडलेश्वर नितिन मतकर को लेकर हुई एक हल्की-फुल्की टिप्पणी ने महफिल में ठहाके बिखेर दिए। इस सहज पल ने साबित किया कि जब अपने लोग साथ बैठते हैं, तो औपचारिकताओं की दीवारें अपने आप टूटने लगती हैं।
इंदौर प्रेस क्लब अध्यक्ष दीपक कर्दम के साथ प्रदीप जोशी, संजय त्रिपाठी, अभिषेक चेंड़के, प्रमोद दीक्षित, मुकेश तिवारी, अजय तिवारी, अंशुल मुकाती, संजय कांबले, राजू घोलप, प्रमोद नीमा त्यागी, अभिषेक रघुवंशी, संजय मालवीय, कृष्णकांत व्यास, किशोर सिंह, सचिन वर्मा, गोपाल वर्मा, अशोक गोड़ और नितिन जैन सहित अनेक पत्रकार साथी मौजूद रहे। अतिथि दीप्ति हाड़ा सहित अन्य गणमान्यजन की उपस्थिति ने भी आयोजन की गरिमा बढ़ाई।
चांदनी रात में भजिए, सैंडविच और खीर का स्वाद
आयोजन में सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और संवाद के साथ खानपान ने भी सभी का ध्यान आकर्षित किया। मिर्ची और पालक सहित विभिन्न प्रकार के गरमागरम भजिए, सैंडविच और शरद पूर्णिमा की चांदनी में परोसी गई स्वादिष्ट खीर ने शाम की मिठास बढ़ा दी।
पकवानों की खुशबू, चांदनी रात की शीतलता और साथियों के बीच बैठकर बातचीत करने का आनंद इस आयोजन को यादगार बनाता रहा। यहां स्वाद केवल व्यंजनों का नहीं, बल्कि साथ होने और अपनापन महसूस करने का भी था।
खबरों से इतर रिश्तों को वक्त देने की पहल
इंदौर प्रेस क्लब का यह आयोजन अपने पीछे एक खूबसूरत संदेश छोड़ गया कि पत्रकारिता केवल खबरों, घटनाओं और जिम्मेदारियों तक सीमित नहीं है। पत्रकार भी एक परिवार का हिस्सा हैं, जिनके बीच आपसी संवाद, सहयोग और आत्मीयता का बने रहना उतना ही जरूरी है जितना अपने पेशे के प्रति समर्पित रहना।
दीपक कर्दम की पहल ने पत्रकारिता परिवार को ऐसा अवसर दिया, जहां खबरों की गंभीरता के बीच मुस्कुराहटों के लिए जगह बनी, औपचारिक मुलाकातों की जगह आत्मीय संवाद ने ली और व्यस्त दिनचर्या के बीच कुछ पल अपनों के नाम हुए।
क्योंकि दूसरों की आवाज बनने वालों को भी कभी अपनी बात कहने का अवसर मिलना चाहिए। दूसरों के सुख-दुख को शब्द देने वालों को भी अपने लोगों के बीच बैठकर सुकून महसूस करने का हक है।
जो रोज जमाने का दर्द लिखते हैं, उन्हें भी मुस्कुराने दीजिए,
खबरों से जरा दूर सही, अपनों के पास आने दीजिए।
चांदनी रात थी, महफिल थी और अपनों का साथ था,
यही तो जिंदगी का सबसे खूबसूरत एहसास था।

