हर 32 घंटे में एक पति की हत्या? आंकड़े कर रहे हैं हैरान

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विशेष रिपोर्ट | रणजीत टाइम्स
हाल के वर्षों में देशभर में पति-पत्नी के रिश्तों से जुड़े अपराधों ने समाज को झकझोर कर रख दिया है। विशेष रूप से कुछ चर्चित मामलों में पत्नियों द्वारा अपने पतियों की हत्या की घटनाएं चर्चा का विषय बनी हैं।
राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) पत्नी द्वारा पति की हत्या के मामलों को अलग श्रेणी में प्रकाशित नहीं करता, लेकिन विभिन्न शोधों और मीडिया रिपोर्टों के अनुसार पिछले कुछ वर्षों में ऐसे मामलों में वृद्धि देखी गई है।

  • उपलब्ध आंकड़े
  •  कुछ स्वतंत्र विश्लेषणों के अनुसार:
  • 5 राज्यों के आंकड़ों के अध्ययन में पिछले 5 वर्षों में लगभग 785 पति अपनी पत्नियों द्वारा हत्या के शिकार पाए गए।
  •  इसका औसत लगभग 157 मामले प्रति वर्ष बैठता है।
  • कुछ शोधों के अनुसार भारत में औसतन हर 32 घंटे में एक पति की हत्या उसकी पत्नी द्वारा किए जाने का मामला सामने
  • आता है।
  • अनुमानित रूप से देश में हर वर्ष 270 से 300 के बीच ऐसे मामले सामने आ सकते हैं।
  • हत्या के प्रमुख कारण
  • विशेषज्ञों के अनुसार अधिकांश मामलों में निम्न कारण पाए गए:
  • विवाहेतर संबंध
  • पारिवारिक कलह
  • संपत्ति विवाद
  • आर्थिक तनाव
  • घरेलू हिंसा और प्रतिशोध
  • नशे की लत एवं मानसिक तनाव

  • दूसरी तस्वीर भी महत्वपूर्ण
    जहां पति की हत्या के मामले चिंता का विषय हैं, वहीं महिलाओं के विरुद्ध अपराधों की संख्या इससे कहीं अधिक है।

  • वर्ष 2023 में:
  • 1.33 लाख से अधिक "पति या रिश्तेदारों द्वारा क्रूरता" के मामले दर्ज हुए।
  • हजारों महिलाओं ने घरेलू हिंसा और दहेज प्रताड़ना की शिकायत दर्ज कराई।
  • देश में हर वर्ष हजारों दहेज मृत्यु के मामले भी सामने आते हैं।
  • समाज के लिए संदेश
    विशेषज्ञ मानते हैं कि परिवार में संवाद की कमी, बढ़ता तनाव और रिश्तों में विश्वास का अभाव कई बार अपराध की जड़ बनता है। चाहे पीड़ित पति हो या पत्नी, हिंसा किसी समस्या का समाधान नहीं है।
    रिश्तों को बचाने के लिए समय रहते परामर्श, परिवार का सहयोग और कानूनी सहायता लेना आवश्यक है। क्योंकि एक अपराध केवल एक व्यक्ति का जीवन नहीं छीनता, बल्कि पूरे परिवार को प्रभावित करता है।

  • निष्कर्ष
    भारत में पत्नी द्वारा पति की हत्या के मामले कुल अपराधों की तुलना में कम हैं, लेकिन इनकी संख्या इतनी है कि समाज को इस पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। मजबूत रिश्ते, पारदर्शिता और आपसी सम्मान ही ऐसे अपराधों को रोकने का सबसे प्रभावी उपाय हैं।

— संपादकीय विभाग, रणजीत टाइम्स:

 


प्रधान संपादक गोपाल गावंडे 
"रिश्तों में संवाद रहेगा, तो परिवार सुरक्षित रहेगा।"

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