भारत-न्यूजीलैंड व्यापारिक रिश्तों में नया अध्याय: आज नई दिल्ली में साइन होगी मेगा डील, आगरा के जूता उद्योग से लेकर फार्मा तक को बड़ा लाभ
नई दिल्ली. भारतीय मार्केट में लिए आज बहुत ही खास दिन है, क्योंकि भारत और न्यूजीलैंड के बीच बड़ी डील साइन होने जा रही है. 27 अप्रैल, 2026 को नई दिल्ली के भारत मंडपम में औपचारिक रूप से मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर हस्ताक्षर करने जा रहे हैं. यह डील साइन केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और न्यूजीलैंड के व्यापार और निवेश मंत्री टॉड मैक्ले की मौजूदगी में होगी.
कुछ महीने पहले ही इस डील को लेकर ऐलान हुआ था और अब इस डील पर हस्ताक्षर होने जा रहा है. 16 मार्च 2025 को इस डील को लेकर बातचीत शुरू हुई और 22 दिसंबर 2025 को पूरी हो गई थी और सिर्फ 9 महीने में ही इसे पूरा कर लिया गया.
बिजनेस टुडे के अनुसार, इसे भारत के उन सबसे तेज व्यापार समझौतों में से एक बताया जा रहा है, जो बातचीत से हस्ताक्षर तक पहुंचे हैं. औपचारिक रूप से लागू होने से पहले इस समझौते को दोनों देशों में घरेलू अप्रूवल की आवश्यकता होगी, जिसके 2026 के अंत में होने की उम्मीद है.
वाणिज्य मंत्रालय के मुताबिक, इस समझौते के लागू होने के पहले दिन से ही भारत के सभी 8,284 वस्तुओं के निर्याता को न्यूजीलैंड के बाजार में टैक्स फ्री एंट्री मिलेगी. बिजनेस स्टैंडर्ड की रिपोर्ट के अनुसार, इस समझौते से पहले, न्यूजीलैंड भारतीय वस्तुओं पर औसतन 2.2 प्रतिशत का शुल्क लगाता था, जिसमें कपड़ा, सिरेमिक और ऑटोमोबाइल समेत लगभग 450 उत्पाद कैटेगरी पर 10 प्रतिशत तक का शुल्क लगता था.
इसके अलावा, फाइबर, टेक्सटाइल्स, हथकरघा और फर्निशिंग चीजों पर भी शून्य टैक्स लागू होगा. चमड़ा और जूता क्षेत्र में शुल्क 5 प्रतिशत से घटाकर शून्य कर दिया गया है. वाणिज्य मंत्रालय के एक आधिकारिक बयान के अनुसार, आगरा भारत के चमड़े के जूता उत्पादन में लगभग 75 प्रतिशत का योगदान देता है. अब आगरा का इससे सीधा लाभ मिलेगा. बिजनेस टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, 2030 तक टैक्स छूट 50 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है.
भारत के फार्मास्युटिकल और मेडिकल डिवाइस सेक्टर को न्यूजीलैंड में आसानी से पहुंच मिलेगी. वाणिज्य मंत्रालय के फैक्टशीट के अनुसार, न्यूजीलैंड सरकार संयुक्त राज्य अमेरिका के खाद्य और औषधि प्रशासन, यूरोपीय औषधि एजेंसी और ब्रिटेन की औषधि और स्वास्थ्य उत्पाद नियामक एजेंसी समेत तुलनीय अंतरराष्ट्रीय नियामकों द्वारा जारी गुड मैन्युफैक्चरिंग प्रैक्टिस (जीएमपी) और गुड क्लिनिकल प्रैक्टिस (जीसीपी) निरीक्षण रिपोर्टों को स्वीकार करेगी, जिससे दोहराव वाले निरीक्षण समाप्त हो जाएंगे और अनुपालन लागत कम होंगे.
वाणिज्य मंत्रालय की फैक्टशीट के अनुसार, शून्य शुल्क पहुंच वाले अन्य भारतीय क्षेत्रों में हल्के इंजीनियरिंग सामान, खेल के सामान, रसायन, इलेक्ट्रॉनिक्स, खाद्य प्रसंस्करण और कृषि शामिल हैं, जिनमें फल और सब्जियां, कॉफी, कोको, मसाले और अनाज शामिल हैं.
बिजनेस स्टैंडर्ड के अनुसार, न्यूजीलैंड की प्रमुख निर्यात कैटेगरी में ऊन, शराब, लकड़ी, कोयला और ताजे फल, विशेष रूप से एवोकाडो और ब्लूबेरी शामिल हैं, जिन्हें इससे लाभ मिलने की संभावना है. समझौते के तहत सहयोग का दायरा बागवानी, शहद, वानिकी, पशुधन, मत्स्य पालन और मधुमक्खी पालन तक विस्तारित है. इसके अलावा, किवी, सेब और शहद पर व्यापक पहुंच होगी.
साभार आज तक

