सिमरोल हत्याकांड में सभी आरोपी बरी: कोर्ट ने कहा - हत्या हुई, लेकिन किसने की यह साबित नहीं कर पाया अभियोजन

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पत्रकार :-  खुशबू श्रीवास्तव

महू। सिमरोल थाना क्षेत्र में 24 दिसंबर 2024 को हुए चर्चित अश्वंत उर्फ बारीक हत्याकांड में पंचम अपर सत्र न्यायालय, डॉ. अंबेडकर नगर (महू) ने बड़ा फैसला सुनाते हुए सभी आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया। न्यायालय ने अपने 14 पृष्ठों के निर्णय में कहा कि अभियोजन पक्ष हत्या के आरोपों को संदेह से परे साबित करने में पूरी तरह असफल रहा। परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की कड़ियां एक-दूसरे से नहीं जुड़ सकीं, इसलिए आरोपियों को दोषी नहीं ठहराया जा सकता।

कोर्ट ने माना कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट से यह स्पष्ट है कि अश्वंत उर्फ बारीक की मौत सामान्य नहीं बल्कि मानव वध (हत्या) के कारण हुई थी। हालांकि अभियोजन यह साबित नहीं कर सका कि हत्या आरोपियों ने ही की।

निर्णय में कहा गया कि अभियोजन द्वारा प्रस्तुत 'लास्ट सीन' थ्योरी, राहगीरों के बयान, मोबाइल कॉल डिटेल, इंस्टाग्राम चैट, कथित हथियारों की बरामदगी और एफएसएल रिपोर्ट में कई महत्वपूर्ण कमियां और विरोधाभास रहे। आरोपियों की निशानदेही पर जब्त बांस के डंडों पर मानव रक्त तो मिला, लेकिन उसका ब्लड ग्रुप निर्धारित नहीं किया गया। ऐसे में यह साबित नहीं हो सका कि वह रक्त मृतक का ही था।

न्यायालय ने यह भी माना कि इंस्टाग्राम विवाद को हत्या का कारण बताया गया, लेकिन उससे जुड़े इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य और जांच न्यायालय के समक्ष प्रमाणित नहीं किए जा सके। वहीं मोबाइल फोन की बरामदगी और कॉल डिटेल रिकॉर्ड भी अभियोजन के घटनाक्रम की पुष्टि नहीं कर सके।

इन सभी तथ्यों को देखते हुए न्यायालय ने भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 61, 103 एवं 238 के आरोपों से सभी आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया। साथ ही आदेश दिया कि जेल में निरुद्ध आरोपियों को, यदि किसी अन्य मामले में आवश्यकता न हो, तो तत्काल रिहा किया जाए।

बचाव पक्ष ने उठाए जांच पर सवाल

प्रकरण में आरोपियों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अरविंद कुमार बाथम, अधिवक्ता मनोज द्विवेदी, अधिवक्ता अभिषेक शर्मा, अधिवक्ता शैलेश यादव एवं अधिवक्ता हिमांशु शर्मा ने पैरवी की। बचाव पक्ष ने जांच में खामियां, बरामदगी की प्रक्रिया, एफएसएल रिपोर्ट, कॉल डिटेल और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों में विरोधाभास को प्रमुखता से न्यायालय के समक्ष रखा। न्यायालय ने इन तर्कों पर सहमति जताते हुए अभियोजन को आरोप सिद्ध करने में असफल माना और सभी आरोपियों को बरी करने का फैसला सुनाया।

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