गैस सिलेंडर वितरण में अनियमितता का आरोप — सिमलिया की जनता में रोष

  • Share on :

सिमलिया क्षेत्र की इंडियन गैस एजेंसी पर गंभीर आरोप सामने आए हैं। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि सिलेंडर वितरण प्रक्रिया में भारी अनियमितता बरती जा रही है, जिससे आम उपभोक्ता परेशान हैं और जनता में गहरा आक्रोश व्याप्त है।
क्या है पूरा मामला?
स्थानीय निवासियों के अनुसार, सिलेंडर बुकिंग के बावजूद समय पर डिलीवरी नहीं हो रही। उपभोक्ताओं को लंबा इंतजार करना पड़ता है, जिससे रसोई का काम प्रभावित होता है। वहीं आरोप है कि कुछ खास लोगों को बिना प्रतीक्षा के सिलेंडर उपलब्ध करा दिए जाते हैं, जिससे वितरण प्रणाली की पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं।
DBC कनेक्शन धारकों के साथ सबसे बड़ा अन्याय
डबल बॉटल कनेक्शन (DBC) धारकों की स्थिति और भी गंभीर बताई जा रही है। उपभोक्ताओं का कहना है कि पहला सिलेंडर 21 दिन बाद भी नहीं मिलता, जबकि दूसरे सिलेंडर के लिए 45 दिन तक इंतजार कराया जाता है।
जबकि DBC का उद्देश्य ही निरंतर गैस आपूर्ति सुनिश्चित करना है, लेकिन वर्तमान व्यवस्था इसके विपरीत दिखाई दे रही है।
???? KYC के नाम पर उत्पीड़न
एजेंसी पर यह भी आरोप है कि KYC अपडेट न होने का हवाला देकर सिलेंडर देने से मना किया जा रहा है।
जबकि नियमों के अनुसार:
e-KYC घर बैठे मोबाइल ऐप और Aadhaar FaceRD के माध्यम से किया जा सकता है।
केवल 9 महीने से निष्क्रिय कनेक्शन पर KYC अनिवार्य है।
e-KYC न होने पर भी 7वें रिफिल तक सब्सिडी जारी रहती है।
इसके बावजूद नियमित उपभोक्ताओं को एजेंसी के चक्कर लगाने पर मजबूर किया जा रहा है, जो स्पष्ट रूप से नियमों के विपरीत है।
???? नियमों का उल्लंघन
तेल कंपनियों के दिशा-निर्देशों के अनुसार DBC उपभोक्ताओं को समय पर गैस उपलब्ध कराना डीलर की जिम्मेदारी है। 45 दिन की देरी उपभोक्ता अधिकारों का सीधा हनन है।
????️ प्रशासन से कार्रवाई की माँग
आक्रोशित नागरिकों ने प्रशासन और संबंधित विभागों से मांग की है कि:
DBC उपभोक्ताओं को हो रही देरी की जांच की जाए
KYC के नाम पर हो रहे उत्पीड़न पर रोक लगे
घर बैठे e-KYC की सुविधा सुनिश्चित की जाए
दोषी डीलर पर लाइसेंस निरस्तीकरण सहित सख्त कार्रवाई हो
❓ अधिकारी मौन क्यों?
इस मामले में संबंधित अधिकारियों से प्रतिक्रिया लेने का प्रयास किया गया, लेकिन संतोषजनक जवाब नहीं मिला। प्रशासन की चुप्पी से जनता का संदेह और बढ़ गया है।
 जब एक उपभोक्ता को पहले सिलेंडर के लिए 21 दिन और दूसरे के लिए 45 दिन इंतजार करना पड़े, और KYC के नाम पर परेशान किया जाए, तो यह केवल लापरवाही नहीं बल्कि सुनियोजित उत्पीड़न का संकेत है।
विकास भारद्वाज
लीगल एडवाइजर, रणजीत टाइम्स

Latest News

Everyday news at your fingertips Try Ranjeet Times E-Paper