सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित
बालिकाओं की शिक्षा, सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं अधिकारों के प्रति किया जागरूक
डिंडौरी। सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत कलेक्टर श्रीमती अंजू पवन भदौरिया के निर्देशन एवं प्रभारी जिला कार्यक्रम अधिकारी श्री श्याम सिंगोरे के मार्गदर्शन में बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ योजना के तहत जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा मातृशक्ति प्रशिक्षण संस्थान, डिंडौरी में आयोजित कार्यक्रम का उद्देश्य महिलाओं एवं बालिकाओं के प्रति सकारात्मक सोच विकसित करना, बालिकाओं को शिक्षा के लिए प्रोत्साहित करना तथा उनके अधिकारों एवं सुरक्षा के प्रति समुदाय को जागरूक करना रहा।
कार्यक्रम में महिलाओं एवं बालिकाओं को बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान के उद्देश्यों की जानकारी देते हुए बालिकाओं की शिक्षा, स्वास्थ्य एवं पोषण सुनिश्चित करने तथा उन्हें सुरक्षित एवं सम्मानजनक वातावरण उपलब्ध कराने के संबंध में जागरूक किया गया। महिलाओं को बालिकाओं के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने तथा किसी भी प्रकार के भेदभाव को समाप्त कर उन्हें समान अवसर प्रदान करने के लिए प्रेरित किया गया।
बाल विवाह की रोकथाम एवं बाल अधिकारों की दी जानकारी
जागरूकता कार्यक्रम में बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006 एवं बाल अधिकार संरक्षण से संबंधित महत्वपूर्ण प्रावधानों की जानकारी दी गई। बाल विवाह के दुष्परिणामों तथा इसकी रोकथाम में परिवार एवं समुदाय की भूमिका पर चर्चा की गई। साथ ही बालिकाओं को निरंतर शिक्षा से जोड़ने और उनके सर्वांगीण विकास के लिए परिवार एवं समाज की जिम्मेदारी के बारे में बताया गया।
सहायता सेवाओं की दी जानकारी
कार्यक्रम में महिलाओं एवं बालिकाओं को आवश्यकता पड़ने पर सहायता प्राप्त करने के लिए महिला हेल्पलाइन नंबर 181, चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर 1098 एवं वन स्टॉप सेंटर सहित उपलब्ध सहायता सेवाओं की जानकारी दी गई। इस दौरान महिलाओं से संवाद कर उनकी समस्याओं एवं जिज्ञासाओं को सुना गया तथा संबंधित विषयों पर आवश्यक मार्गदर्शन प्रदान किया गया।
शिक्षा, सुरक्षा और सशक्तिकरण का दिया संदेश
सेवा संकल्प अभियान के माध्यम से महिलाओं एवं बालिकाओं को संदेश दिया गया कि बालिकाओं की शिक्षा, सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं सम्मान सुनिश्चित करना केवल परिवार ही नहीं, बल्कि पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। कार्यक्रम में बालिकाओं को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहते हुए शिक्षा, आत्मनिर्भरता एवं सशक्तिकरण की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया गया।

