अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी: 80 लाख की बरामदगी के बाद अब आरोपियों के घरों पर ताबड़तोड़ छापेमारी
अयोध्या। अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावा चोरी को लेकर पुलिस ने अब ताबड़तोड़ छापेमारी शुरू कर दी है। चोरी के मामले में 80 लाख रुपए से ज्यादा की बरामदगी और रुपयों की गिनती से जुड़े आठ लोगों की गिरफ्तारी के बाद इनके घरों पर छापेमारी की गई है। सभी आरोपियों के खिलाफ तगड़ा ऐक्शन लेने के लिए पुलिस की टीमें साक्ष्य जुटाने की कोशिश में जुटी हैं। फिलहाल आज की छापेमारी के बारे में विस्तृत ब्योरा तो अभी पुलिस की तरफ से नहीं दिया गया है लेकिन कहा जा रहा है कि आरोपियों को जेल भेजने से पहले हुई पूछताछ के आधार पर कुछ और रुपयों और संपत्ति की पड़ताल के लिए पुलिस टीमें दबिश में जुटी हैं। इस दौरान परिवार वालों के साथ ही पड़ोसियों से भी पुलिस ने जानकारी हासिल की है।
अयोध्या राम मंदिर दान घोटाला को लेकर पुलिस ने रविवार को रामधाम स्थित स्वर्गद्वार मोहल्ले में रहने वाले चंपत राय के बेहद करीबी रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू, कौशलपूरी निवासी अनुकल्प मिश्र और रुदौली निवासी लवकुश मिश्रा समेत सभी आरोपियों के आवासों पर दबिश दी। कई लोगों के घर खुलवाने में पुलिस को मशक्कत भी करनी पड़ी। इस दौरान टीम ने मामले से जुड़े संभावित साक्ष्य एकत्र किए और आवश्यक जानकारी जुटाई।
कहा जा रहा है कि पुलिस की जांच टीमें इन आरोपियों से जुड़े दस्तावेजों और अन्य महत्वपूर्ण तथ्यों का सत्यापन कर रही है। पुलिस की कोशिश मंदिर में काम करने से पहले और अब इन आरोपियों की हैसियत की जांच की जा रही है। रामजन्मभूमि थाना प्रभारी निरीक्षक सुमित श्रीवास्तव ने आरोपियों के घरों पर पुलिस की दबिश और जांच की पुष्टि करते हुए कहा कि आगे भी जब जरूरत होगी इसी तरह की कार्रवाई जारी रह सकती है।
चढ़ावा चोरी को लेकर सीएम योगी के निर्देश पर बनी एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट मिलने के बाद पुलिस का ऐक्शन तेज हुआ है। ट्रस्ट की तरफ से नोटों की गिनती में लगाए गए आठ लोगों रामशंकर उर्फ टिन्नू यादव, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, सुभाष चंद्र श्रीवास्तव, करुणेश पांडेय, मनीष यादव, अविनाश शुक्ला और रमाशंकर मिश्रा के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज कराई थी। रिपोर्ट दर्ज होने के कुछ घंटों के अंदर ही इन आरोपियों की गिरफ्तारी भी हो गई। इनसे करीब 80 लाख रुपए बरामद भी किए गए।
बिना एफआईआर एसआईटी की जांच पर भी विपक्षी दल समेत अन्य लोग सवाल उठा रहे हैं। उनका कहना है कि सबसे पहले एफआईआर और गिरफ्तारी ही होनी चाहिए थी। एसआईटी गठन के एक हफ्ते बाद एफआईआर और गिरफ्तारी के कारण काफी कुछ हटाने और ठिकाने लगाने का मौका इन आरोपियों को मिल गया होगा। आज की छापेमारी पर भी सवाल उठ रहे हैं। कहा जा रहा है कि आरोपियों को रिमांड पर नहीं लेने और इतने दिनों बाद छापेमारी में कुछ खास मिलने की उम्मीद नहीं है।
साभार लाइव हिन्दुस्तान

