सावधान रहो
जो लोग फँसाना चाहते हैं,
अपने जाल में उलझाना चाहते हैं,
जो लोग घेरकर वार करें,
मीठी बातों से व्यापार करें,
जो लोग आपका शिकार करें,
स्वार्थ के लिए प्यार करें,
ऐसे लोगों से रहना दूर,
मत मिलाना उनके सुर में सुर।
हर मुस्कान सच्ची नहीं होती,
हर दोस्ती अच्छी नहीं होती,
कुछ चेहरे नकाब पहनते हैं,
मौका देखकर रंग बदलते हैं।
सीखो “ना” भी कहना यार,
यही बनाता जीवन सशक्त और शानदार।
जहाँ ज़रूरी हो “हाँ” कहो,
जहाँ गलत लगे वहाँ “ना” कहो।
जो हर बात पर झुक जाता है,
वह अक्सर धोखा खा जाता है।
अपनी सीमा खुद तय करना,
हर रिश्ते को मत सिर पर धरना।
सम्मान करो, सम्मान लो,
पर अपने स्वाभिमान को कभी मत खो।
दुनिया में वही मजबूत कहलाता है,
जो सही समय पर इंकार भी कर पाता है।
इसलिए अपनी पहचान बनाओ,
सच और विवेक का दीप जलाओ।
जो फँसाना चाहें, उनसे दूर रहो,
अपने जीवन के स्वयं हुजूर रहो।
“हर किसी को खुश करना ज़रूरी नहीं,
खुद को बचाकर रखना ज़रूरी है।”

कवि – गोपाल गावंडे

