घर पर सहज योग ध्यान कैसे करें (स्टेप, बाय स्टेप)
यदि किसी कारणवश सेंटर जाने की असमर्थता हो तो हम घर बैठे भी आत्मसाक्षात्कार प्राप्त कर सकते हैं। इससे भी हमें सहज योग माध्यम से प्राप्त होने वाले चैतन्य की अनुभूति हो सकती है व नियमित ध्यान से गहनता भी प्राप्त हो सकती है। तो चलिये स्टेप बाय स्टेप ध्यान की प्रक्रिया को समझते हैं।
सबसे पहले घर का एक शांत कमरा चुनें और जमीन पर या कुर्सी पर आराम से बैठें।
हमें अपनी परमपूज्य माताजी श्री निर्मला देवी की एक फोटो को सामने रखना है। यदि फोटो नहीं है तो मोबाइल पर भी एक बार माँ को ध्यान से देखकर आंखें बंद कर लें। अपने हृदय में आदि शक्ति (श्री माताजी) का आह्वान करें, उनसे प्रार्थना करें कि,"हे परमपूज्य श्री माताजी कृपया मेरे हृदय मे आइये। माँ, मैं आत्मसाक्षात्कार पाना चाहता/चाहती हूँ। माँ मुझपर कृपा करें और मुझे मेरा आत्मसाक्षात्कार प्रदान कीजिये।"
अपना ध्यान अपने सिर के सबसे ऊपरी भाग (तालु) पर केंद्रित करें, जिसे योग की भाषा में सहस्त्रार कहते हैं। यदि विचार ज्यादा आयें तो श्वास प्रक्रिया पर ध्यान देना है, कुछ पल श्वास को रोक लेना है, विचार भी थम जायेंगे।
ध्यान के स्टेप्स को पहले अच्छी तरह समझ लेना है फिर ध्यान शुरु करना है। ध्यान के दौरान दोनों हथेलियों की स्थिति पर ध्यान रखना है। हथेलियों व सिर के तालु भाग में दिव्य चैतन्य की अनुभूति होती है। ध्यान के स्टेप्स इस प्रकार हैं:-
1) बायाँ हाथ गोद में खुला रखेंगे। अपना दाहिना हाथ अपने हृदय पर रखकर हम प्रार्थना करेंगे, "हे परमपूज्य श्री माताजी आपकी असीम कृपा में मैं एक पवित्र आत्मा हूँ।" (इसे सात बार दोहरायें)। हाथ ऐसे ही रखते हुए कुछ पल हृदय में ध्यान करेंगे।
2) दाहिने हाथ को धरती पर रखेंगे प्रार्थना करेंगे, "हे परमपूज्य श्री माताजी मेरे बांयी ओर की समस्त बाधाओं को धरा तत्व में खींच लें। मेरे बांयी नाडी को संतुलन प्रदान करें। हाथ ऐसे ही रखते हुए कुछ पल ध्यान करेंगे।
3) बांये हाथ को कोहनी से मोड़कर आकाश की ओर करेंगे। दाहिना हाथ खुला हुआ गोद में। प्रार्थना करेंगे," हे परमपूज्य श्री माताजी कृपा कर मेरी दाहिनी ओर की समस्त बाधाओं को आकाश तत्व में खीच लें। मेरी दाहिनी ओर की नाड़ी को स्वच्छ कर दें।" कुछ पल इसी स्थिति में ध्यान करेंगे।
4) दाहिना हाथ अपने माथे पर रखते हुए अपने सिर को श्रृद्धापूर्वक सामने की ओर झुकायेंगे। प्रार्थना करेंगे, "हे परमपूज्य श्री माताजी मैंने सभी को क्षमा कर दिया है, मैंने स्वयं को भी क्षमा कर दिया है।" इसी अवस्था में कुछ देर ध्यान करेंगे।
5) अपने दाहिने हाथ को अपने सिर के उपर तालु भाग पर रखेंगे। प्रार्थना करेंगे, "हे परमपूज्य श्री माताजी हमें हमारा आत्मसाक्षात्कार प्रदान करे।" हथेली को अपने तालु भाग पर गोल गोल घुमाते हुये इस प्रार्थना को सात बार दोहरायेंगे। हाथ को एक दो बार तालु भाग में उपर नीचे करते हुये चैतन्य की अनुभूति लेने का प्रयास करेंगे।
धीरे से अपनी दोनों हथेलियों को आकाश की ओर करके अपनी गोद में रखेंगे। अपनी हथेलियों या सिर के ऊपर एक ठंडी हवा (डिवाइन वाइब्रेशन) का अनुभव करने का प्रयास करेंगे। किसी भी बात का विचार न करेंगे (निर्विचारिता)। बस शांत रहेंगे और इस दिव्य प्रेम (परम ऊर्जा) को महसूस करेंगे।
सहजयोग का अनुभव सामूहिक ध्यान में सबसे अच्छा होता है। अत: विस्तार से सहज योग को जानने हेतू और आत्मसाक्षात्कार को प्राप्त करने हेतु अपने नज़दीकी सहजयोग ध्यान केंद्र की जानकारी टोल फ्री नंबर 1800 2700 800 से प्राप्त कर सकते हैं। सहज योग सदैव नि:शुल्क है।

