नगरपालिका के नोटिस को बताया गैर-कानूनी, व्यवसायी पहुंचे सर्वोच्च न्यायालय
शिवपुरी से ऋषि गोस्वामी की रिपोर्ट
नगरपालिका द्वारा जारी किए गए नोटिस और अतिक्रमण/कार्रवाई की चेतावनियों के बीच संबंधित व्यवसायी/ समीर गांधी ने अपना पक्ष रखा है। उन्होंने पालिका प्रशासन पर कानूनी प्रक्रियाओं का सही ढंग से पालन न करने का आरोप लगाया है।
जमीन का मालिकाना हक: व्यवसायी ने बताया कि संबंधित जमीन ग्वालियर भारत के नाम दर्ज संस्था की है और वे उसमें भागीदार (पार्टनर) के तौर पर काम कर रहे हैं। इस जमीन का कुल फ्रंट लगभग 650 फीट है, जिसमें से करीब 100 फीट फ्रंट (1/6 भाग) उनका है।
नोटिस की वैधता पर सवाल: उन्होंने कहा कि नगरपालिका की ओर से मिला नोटिस गैर-कानूनी है। कानून के अनुसार किसी भी कार्रवाई से पहले कम से कम 15 दिन का नोटिस दिया जाना चाहिए, सुनवाई का अवसर मिलना चाहिए और अंतिम नोटिस जारी होना चाहिए। जबकि उन्हें 10 दिन का नोटिस दिया गया, जो नियमों के विपरीत है।
सर्वोच्च न्यायालय में मामला विचारधीन: व्यवसायी ने जानकारी दी कि वे इस मामले को लेकर सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) की शरण में गए हैं। नगरपालिका ने भी वहां कैविएट (Caveat) दाखिल की है, जिससे यह मामला अब पूरी तरह से न्यायालय के विचारधीन हो गया है। ऐसे में कोई भी जबरन कार्रवाई गैर-कानूनी होगी।
प्रशासन से अपील: हाथ जोड़कर अपील करते हुए उन्होंने कहा कि प्रशासन को कानून और नियमों के दायरे में रहकर प्रक्रिया का पालन करना चाहिए। यदि कानूनी प्रक्रिया का सही से पालन किया जाता है, तो वे स्वयं कानून का पूरा सहयोग करेंगे।

