हिंद महासागर में चीन की खैर नहीं: नौसेना की ताकत बढ़ाएगा सबमरीन किलर INS मालवन
नई दिल्ली। हिंद महासागर क्षेत्र में चीन की बढ़ती पनडुब्बी गतिविधियों पर नजर रखने और उनसे मुकाबला करने के लिए भारतीय नौसेना को नई ताकत मिली है,अब ड्रैगन के सामने दहाड़ने के लिए यह मेड इन भारत सबमरीन कीलर आ गया है। नौसेना ने बुधवार को कर्नाटक के कारवार नौसैनिक अड्डे पर INS मालवन को सेवा में शामिल किया। यह माहे श्रेणी (Mahe-class) का दूसरा एंटी-सबमरीन वॉरफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट (ASW-SWC) है, जिसे खास तौर पर उथले समुद्री इलाकों में दुश्मन की पनडुब्बियों का पता लगाने और उन पर कार्रवाई करने के लिए बनाया गया है।
इस समारोह में वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल ए.पी. सिंह मुख्य अतिथि रहे। उनके साथ पश्चिमी नौसेना कमान के प्रमुख वाइस एडमिरल संजय वात्स्यायन और नौसेना के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे। एयर चीफ मार्शल ने कहा कि भविष्य का कोई भी युद्ध केवल एक सेना नहीं लड़ेगी, बल्कि थल सेना, नौसेना और वायुसेना मिलकर देश की सुरक्षा करेंगी। उन्होंने समुद्री व्यापार के सुरक्षित रहने के महत्व पर भी जोर दिया।
INS मालवन का नाम महाराष्ट्र के ऐतिहासिक तटीय शहर मालवन के नाम पर रखा गया है, जो छत्रपति शिवाजी महाराज की समुद्री विरासत से जुड़ा है। इस युद्धपोत के प्रतीक चिह्न (क्रेस्ट) पर शिवाजी महाराज के प्रसिद्ध हथियार 'वाघनख' को जगह दी गई है। यह साहस, सतर्कता और दुश्मन पर सटीक वार करने का प्रतीक माना जाता है।
साभार नवभारत टाइम्स

