CJI सूर्यकांत ने लोकतंत्र को बताया 'चारपाई' जैसा: 'कड़ा भी, लचीला भी', यही है न्यायपालिका की शक्ति

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नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने न्यायिक स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक ढांचे की 'स्वदेशी' व्याख्या की. उन्होंने लोकतंत्र की तुलना एक पारंपरिक चारपाई से की, जहां मजबूत लकड़ी का फ्रेम, टिकाऊ पायों और लचीली लेकिन मजबूत रस्सियों के सहारे एक ऐसा ढांचा तैयार करता है जो 'कड़ा भी है और लचीला भी.'
CJI के मुताबिक, यही संतुलन भारतीय लोकतंत्र और न्यायपालिका की असली शक्ति है. CJI सूर्यकांत हरियाणा में ओपी जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी में आयोजित इंटरनेशनल कन्वेंशन ऑन इंडिपेंडेंस ऑफ जुडिशियरी के उद्घाटन समारोह में बोल रहे थे.
इस कार्यक्रम में एक अनोखा सत्र आयोजित किया गया, जिसमें CJI सूर्यकांत की अगुवाई में सुप्रीम कोर्ट के 13 जज केशवानंद भारती केस की ऐतिहासिक बहस का री-एनैक्टमेंट करने के लिए एक साथ मंच पर आए. यूनिवर्सिटी के अत्याधुनिक मूट कोर्ट में हुए इस सत्र में उस बहस को पुनर्जीवित किया गया जिसने भारतीय संविधान में ‘बेसिक स्ट्रक्चर’ का सिद्धांत स्थापित किया था.
कार्यक्रम 'न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन: अधिकारों, संस्थानों और नागरिकों पर तुलनात्मक दृष्टिकोण' के उद्घाटन के लिए आयोजित किया गया था.
साभार आज तक

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