"कॉकरोच जनता पार्टी" : इतनी तेजी से उभरी एक सेटानिकल पार्टी यानि कि हास्य-व्यंग
मीम्स के लिये बनाई गई पार्टी कि महज पांच दिन में
15 मिलियन फालोवर्स यानि 1 करोड़ पचास लाख फालोवर्स
हो गये
चलिये जानते हैं क्या है ये कॉकरोच जनता पार्टी और इसे बनाने का उद्देश्य क्या है
15 मई 2026, सुप्रीम कोर्ट में नकली डिग्रियों पर सुनवाई चल
रही थी,
चीफ जस्टिस सूर्यकान्त जी ने कहा- ये जो बेरोजगार युवा हैं वो कॉकरोच की तरह होते हैं, नौकरी तो मिलती नहीं ,कोई मीडिया
में चले जाते हैं, कोई सोशल मीडिया एक्टिविस्ट बन जाते हैं और कुछ हर एक को टार्गेट करते हैं, बिना मतलब सिस्टम पर प्रहार करते रहते हैं
युवा बेरोजगार इस टिप्पणी से बहुत आहत हुए
उन्होंने इसे अपना अपमान समझा
हालांकि मुख्य न्यायाधीश ने बाद में बयान दिया कि मैंने ये सिर्फ उनके लिये बोला था जो फर्जी डिग्री के सहारे अलग-अलग प्रोफेशन में आ गये हैं,
मगर महाराष्ट्र पूणे के रहने वाले अभिजीत दीपके जो कि यू.एस. के बोस्टन से मास्टर्स की पढ़ाई कर रहे थे उन्होंने इसे अलग तरह से लिया और मजाक में एक्स पर एक गूगल फार्म डाला और युवाओं से जुड़ने को बोला और सबसे दिलचस्प बात उसने इसके लिये कुछ योग्यतायें रखी जिसमें से पहली थी- बेरोजगार युवा,
दूसरी -युवा आलसी होने चाहिये,
तीसरी- आनलाइन रहने के आदी होने चाहिये और
चौथी-उन्हें सोशल मीडिया पर अपनी भड़ास निकालनी आनी चाहिये
उसका इतना असर हुआ कि पांच दिन में ही इन्स्टा अकाउंट पे
1 करोड़ पचास लाख यानी 15 मिलियन फालोवर्स हो गये
आखिर इतने युवा और बाकी लोग इस पार्टी से इतना क्यूं जुड़ते जा रहे हैं ?
हालांकि ये कोई रजिस्टर्ड पॉलिटिकल पार्टी नहीं है, हास्य व्यंग्य
के लिये बनाई गई एक पार्टी से शुरूआत हुई थी पर अब बहुत आगे जा चुकी है
इनका इन्स्टा अकाउंट सर्च करने पर कुछ घोषणापत्र भी दिखते
हैं
मजाक - मजाक में बनी ये पार्टी आगे कहां जायेगी नहीं पता हालांकि अभिजीत के ऊपर आम आदमी पार्टी से कनेक्शन के आरोप भी लग रहे हैं और वो 2020 से 2023 तक अरविंद केजरीवाल के साथ उनकी कम्युनिकेशन टीम का हिस्सा रह
चुके हैं
मगर युवा इस पार्टी को बहुत पसंद कर रहे हैं और सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी से आहत इनकी संख्या बढ़ती ही जा रही है
होता क्या है कि जो आपकी कमजोरी है, जिसे लेकर आप पहले ही बहुत परेशान हैं और उससे निकलने की कोशिशों में लगे हैं,
उस पर कोई दिल दुखाने और दिल को चुभने वाली बात कह दे तो
वो बात सीधे दिल पर लगती है और फिर उन्हें जहां भी लगता है कि समाधान निकलेगा वो उसी ओर को जाते हैं और बेरोजगारी तो
हमेशा से ही बहुत बड़ी बात है ही
अब समाधान निकले ना निकले ये तो बाद की बात है, फिलहाल उन्हें लग रहा है कि उनके मुद्दों को उठाने और अपनी बात कहने
के लिये एक प्लेटफार्म है जहां से उनके मुद्दों को कहा और सुना जायेगा शायद यही कारण है इतनी संख्या में युवाओं के जुड़ने
का ...
लेखक:
नरेंद्र के यादव
अधिवक्ता उच्च न्यायालय एवं राजनीतिक विश्लेषक

