मौत को मात देकर अंतरराष्ट्रीय मंच तक का सफर
आई बी डबल्यू 2025 में ग्वालियर के प्रमोद धनेले ने साझा की 'जिंदादिली' की दास्तां
ब्यूरो चीफ दिव्यानंद अर्गल
ग्वालियर :- 'इंडिया बाइक वीक 2025' में पूरे भारत से एकमात्र पैरा-राइडर के रूप में शामिल हुए ग्वालियर के प्रमोद धनेले ने मंच से जब अपनी आपबीती सुनाई, तो वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम हो गईं और हौसला बुलंद हो गया। प्रमोद ने बताया कि कैसे एक सकारात्मक सोच इंसान को मौत के मुंह से खींच लाती है।
एक्सीडेंट अंत नहीं, नई शुरुआत है
प्रमोद ने मंच से उस खौफनाक एक्सीडेंट को याद करते हुए कहा, "हादसे हमेशा परिवर्तन के लिए होते हैं। जब मेरा एक्सीडेंट हुआ और पैर कटा, तो मैंने दुखी होने के बजाय कुदरत को 'थैंक्स' बोला। मुझे खुशी थी कि ट्रक का पहिया मेरे ऊपर से नहीं गुजरा, मैं पूरा बच गया, सिर्फ एक पैर ही तो गया था। मैंने मौत को बहुत करीब से देखा था, इसलिए मुझे जीने की एक नई उम्मीद दिखी। प्रमोद ने जीवन का सबसे बड़ा मंत्र साझा करते हुए कहा कि जब हम मुश्किल में हों, तब भी हमें खुशी ढूंढनी चाहिए। उन्होंने बताया, "एक्सीडेंट के वक्त मेरी सबसे बड़ी खुशी यह थी कि एम्बुलेंस जल्दी आ गई, मुझे समय पर अस्पताल पहुंचाया गया और ब्लड मिल गया। उस समय अगर मैं नेगेटिव सोचता तो शायद घबराकर बेहोश हो जाता, लेकिन मेरी पॉजिटिव सोच ने मुझे होश में रखा और मुझे लड़ने की शक्ति दी। वहीं से मेरे नए जीवन की शुरुआत हुई। हजारों राइडर्स और कई देशों के इंटरनेशनल बाइकर्स के बीच प्रमोद अकेले ऐसे व्यक्ति थे जो अपनी शारीरिक कमी को अपनी सबसे बड़ी ताकत बनाकर मंच पर खड़े थे। उन्होंने साबित किया कि अगर हम पॉजिटिव सोचते हैं, तो हमें उम्मीद की किरण दिखती है और पूरी कुदरत हमें फिर से खड़ा करने में जुट जाती है।
प्रमुख संदेश
नकारात्मक सोच: आपको हमेशा परेशान रखेगी।
सकारात्मक सोच: आपको नई शुरुआत के लिए खड़ा करेगी।
अद्वितीय उपलब्धि: पूरे इंडिया बाइक वीक 2025 में भारत के एकमात्र पैरा-राइडर।

