दिल की पाइप में हवा मत भरने देना…
— गोपाल गावंडे की कलम से

एक ही छत के नीचे रहते हैं,
फिर भी कितने दूर हो गए हैं हम,
चेहरे रोज़ दिखाई देते हैं,
पर दिल पढ़ना भूल गए हैं हम।
घर की पानी की टंकी
जब कभी पूरी खाली हो जाती है,
तो पाइपों में हवा भर जाती है,
पानी होते हुए भी
नल तक उसकी धार नहीं आ पाती है।
फिर हम क्या करते हैं?
घर के नल खोल देते हैं,
अंदर फँसी हवा को निकलने देते हैं,
कुछ देर आवाज़ होती है,
कुछ झटके लगते हैं…
और फिर पानी सहज बहने लगता है।
शायद हमारा दिल भी
ऐसी ही एक पाइप है।
उसमें भी धीरे-धीरे
अनकही बातें भरती जाती हैं,
कुछ शिकायतें, कुछ दर्द,
कुछ गलतफहमियाँ, कुछ अधूरे सवाल,
कुछ आँसू जो आँखों तक नहीं आए,
और कुछ शब्द
जो होंठों तक आकर वापस लौट गए।
बस यही सब
दिल के अंदर की “हवा” बन जाता है।
और एक दिन
इंसान के पास सब कुछ होते हुए भी
वह भीतर से घुटने लगता है।
परिवार होता है,
बच्चे होते हैं,
माँ-बाप होते हैं,
भाई-बहन होते हैं,
दोस्त और रिश्तेदार होते हैं…
फिर भी मन पूछता है—
“मेरी बात सुनने वाला कौन है?”
रिश्तों की भीड़ होना
और किसी का अपना होना,
दोनों अलग बातें हैं।
अपना वह नहीं
जो केवल तस्वीर में आपके साथ खड़ा हो,
अपना वह है
जिसके सामने आप बिना डर के कह सकें—
“आज मन ठीक नहीं है…
थोड़ी देर मेरी बात सुनोगे?”
और वह बिना फैसला सुनाए,
बिना मज़ाक बनाए,
बिना आपकी कमजोरी को कल हथियार बनाए,
बस चुपचाप आपकी बात सुन ले।
कभी-कभी इंसान को
सलाह की जरूरत नहीं होती,
समाधान की भी जरूरत नहीं होती,
उसे सिर्फ एक ऐसा इंसान चाहिए
जिसके सामने वह अपना दिल खोल सके।
क्योंकि जब दिल का नल खुलता है,
तो अंदर जमा दर्द बाहर आता है,
मन हल्का होता है,
गलतफहमियों की हवा निकलती है
और रिश्तों में फिर से
प्यार की धार बहने लगती है।
इसलिए जिंदगी में
कम से कम दो ऐसे अपने जरूर कमाना,
जिन्हें आधी रात को भी कह सको—
“मुझे तुमसे कुछ कहना है…”
और उतना ही जरूरी है
कि तुम भी किसी के लिए
वह इंसान बनो।
कोई तुम्हारे पास आए
तो मोबाइल एक तरफ रख देना,
उसकी आँखों में देखना,
उसकी पूरी बात सुनना…
हो सकता है वह बातें नहीं,
अपने मन का बोझ उतार रहा हो।
बड़े मकान बनाने से पहले
दिलों के बीच रास्ते बनाइए,
कमरों को जोड़ने वाले दरवाजे तो बहुत हैं,
अब दिलों को जोड़ने वाले
दरवाजे भी खोलिए।
क्योंकि कई बार
एक घर में पानी की कमी नहीं होती,
बस पाइप में हवा भर जाती है…
और कई बार
एक परिवार में प्यार की कमी नहीं होती,
बस बातचीत रुक जाती है।
नल खोलोगे तो हवा निकलेगी,
दिल खोलोगे तो गलतफहमियाँ निकलेंगी।
और फिर देखना—
वही परिवार,
वही लोग,
वही घर…
लेकिन रिश्तों में
फिर से प्यार बहने लगेगा।
दिल की बात दिल तक पहुँचने दीजिए,
अपने लोगों को बोलने दीजिए…
और कभी-कभी सिर्फ सुन लीजिए।
क्योंकि इस दुनिया में
बोलने वाले बहुत मिल जाते हैं,
लेकिन किसी के दिल का बोझ
चुपचाप सुन लेने वाले
बहुत कम मिलते हैं।
**“जिंदगी में दो ऐसे इंसान जरूर रखिए,
जिनसे आप दिल की बात कह सकें…
और खुद भी किसी के उन दो इंसानों में से एक बनिए।”**
— गोपाल गावंडे की कलम से

